अब गांव के बच्चे भी बनेंगे अफसर- 💻 DM ने खोली हाईटेक IT लैब

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🚨 उत्तरकाशी में शिक्षा की बड़ी क्रांति!

📍उत्तरकाशी

पहाड़ के छात्रों के सपनों को अब नई उड़ान मिलने जा रही है। पीजी कॉलेज उत्तरकाशी में अत्याधुनिक आईटी लैब का उद्घाटन कर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ी पहल की है।
अब तक किताबों तक सीमित रहने वाले छात्रों को हाईटेक कंप्यूटर, इंटरनेट और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के संसाधन एक ही जगह मिलेंगे।

यह पहल सिर्फ एक लैब का उद्घाटन नहीं, बल्कि पहाड़ के युवाओं के भविष्य को डिजिटल ताकत देने की शुरुआत मानी जा रही है।


💻 “डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान जरूरी” – DM

आईटी लैब का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट सुविधा और अन्य तकनीकी संसाधनों का जायजा लिया और संतोष जताया।

उन्होंने छात्रों से कहा:

“आज के डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। छात्र इस लैब का उपयोग केवल पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों के लिए करें।”

डीएम ने छात्रों को अनुशासन, नियमित अभ्यास और समय प्रबंधन को सफलता की असली कुंजी बताया।


📚 लाइब्रेरी में बड़ी सौगात – अब आसान होगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

जिलाधिकारी के निर्देशों पर कॉलेज लाइब्रेरी को भी नई पहचान दी गई है।

अब लाइब्रेरी में उपलब्ध हैं:

  • स्नातक और स्नातकोत्तर की नई किताबें
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष पुस्तकें
  • शोध सामग्री
  • पत्र-पत्रिकाएं

इससे IAS, PCS, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है।


🎓 पहाड़ के युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका

कॉलेज प्राचार्य पंकज पंत ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नई सुविधाओं से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और उनके परिणामों में सुधार होगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि
“यही छात्र भविष्य में बड़े पदों पर पहुंचकर उत्तरकाशी का नाम रोशन करेंगे।”


👥 बड़ी संख्या में छात्र रहे मौजूद

कार्यक्रम में एसडीएम शालिनी नेगी, कॉलेज प्रशासन, छात्र संघ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
छात्रों में नई लैब को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।


❗ पहाड़ के सपनों को मिली नई रफ्तार

जहां कभी संसाधनों की कमी से पहाड़ के छात्र पीछे रह जाते थे, वहीं अब डिजिटल लैब और आधुनिक लाइब्रेरी उनके सपनों को नई दिशा दे रही है।

अब सवाल यह नहीं कि पहाड़ का छात्र क्या कर सकता है…
सवाल यह है कि वह कितनी ऊंचाई तक जाएगा।
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