अधिकारी पहुंचेंगे जनता के बीच, सुनेंगे समस्याएं – करेंगे मौके पर समाधान 🟩सरकार अब गांव-गांव!

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‘सरकार जनता के द्वार’ कार्यक्रम के तहत नवंबर महीने का रोस्टर जारी, 15 टीमें करेंगी गांवों का दौरा

रुद्रप्रयाग, 10 नवंबर 2025 —
अब ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे!
“सरकार खुद पहुंचेगी जनता के दरवाजे” — जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने नवंबर माह के लिए “सरकार जनता के द्वार” कार्यक्रम का रोस्टर जारी कर दिया है। इस दौरान अधिकारी गांवों में जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगे और योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने का संकल्प लेंगे।


🏡 15 टीमें, 45 अधिकारी — सरकार सचमुच पहुंची जनता के द्वार

मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों के लिए कुल 15 तीन-सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं।
हर टीम में अलग-अलग विभागों के अधिकारी होंगे जो स्थलीय भ्रमण, बैठकें और निरीक्षण करेंगे।
उनका लक्ष्य — “ग्रामीणों की समस्याएं सुनना और उसी मंच पर समाधान ढूंढना।”


👥 अफसर और जनता आमने-सामने

कार्यक्रम के तहत अधिकारी सीधे जनता से मिलेंगे।
किसी पंचायत में बिजली, सड़क या पेयजल की दिक्कत हो — समाधान वहीं होगा।
सीडीओ रावत ने कहा,

“सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं गांव के हर व्यक्ति तक पहुंचें, यही हमारा लक्ष्य है। अधिकारी गांव जाकर सुनेंगे, समझेंगे और तुरंत कार्रवाई करेंगे।”


🏔️ अगस्त्यमुनि से ऊखीमठ तक गूंजेगा जनसंवाद

रोस्टर के मुताबिक—

  • उप वन संरक्षक रजत सुमन, जिला सूचना अधिकारी वीरेश्वर तोमर और डॉ. दीपा तिलारा ग्राम पंचायत बावई (अगस्त्यमुनि) जाएंगे।
  • एडीएम श्याम सिंह राणा, उप निदेशक खान वीरेंद्र कुमार, पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ग्राम पंचायत नरकोटा में जनसंवाद करेंगे।
  • एसडीएम जखोली भगत सिंह फोनिया और तहसीलदार बी.एल. शाह धनकुराली में ग्रामीणों से मिलेंगे।
  • एसडीएम ऊखीमठ अनिल शुक्ला, अभियंता आर.पी. नैथानी और तहसीलदार प्रदीप नेगी ग्राम पंचायत उनियाणा में जनता की बात सुनेंगे।

हर टीम मौके पर चल रही विकास योजनाओं का निरीक्षण भी करेगी, ताकि किसी योजना की प्रगति केवल कागज़ों तक सीमित न रहे।


📋 “कभी भी निरीक्षण होगा, तैयार रहें अधिकारी”

सीडीओ रावत ने साफ निर्देश दिए हैं —

“जिलाधिकारी या मैं स्वयं कभी भी किसी भी बैठक में पहुंच सकता हूं। सभी अधिकारी अपनी आवंटित पंचायतों का भ्रमण कर रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराएं।”

यह स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन अब जमीन पर परिणाम देखने के मूड में है, केवल बैठकों या रिपोर्टों से संतुष्ट नहीं होगा।


🌾 जनता में उम्मीद की नई किरण

गांव के बुजुर्ग, महिला मंडल और युवा समूह इस पहल से उत्साहित हैं।
एक ग्रामीण ने कहा —

“पहली बार ऐसा हो रहा है कि अधिकारी खुद हमारे गांव आ रहे हैं, अब हमारी आवाज़ सच में सरकार तक पहुंचेगी।”


💬 अंत में…

“सरकार जनता के द्वार” अब एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-सेवा की असली परीक्षा बन चुका है।
रुद्रप्रयाग प्रशासन का यह कदम जनता और शासन के बीच की दूरी घटाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत है।

🟨 अब देखना यह है कि कितनी जल्दी ‘जनता के द्वार’ से उठी आवाज़, सचिवालय के गलियारों तक पहुंचती है। 🟨


क्या आप मानते हैं कि ऐसे जनसंवाद हर जिले में नियमित रूप से होने चाहिए?
👇 अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं!

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