देवभूमि में पाखंड पर वार — जादू-टोना, झाड़-फूंक और झूठे दावों का काला कारोबार उजागर
देहरादून।
देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र हवा में एक बार फिर “ऑपरेशन कालनेमि” की गूंज सुनाई दी है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश और एसएसपी दून के नेतृत्व में, दून पुलिस ने जादू-टोने, दैवीय प्रकोप और झाड़-फूंक के नाम पर जनता को ठगने वाले पाखंडियों की कमर तोड़ दी है।
चार दिन में 111 ढोंगी बाबाओं की गिरफ्तारी — और ताज़ा बड़ी कार्रवाई में 29 और बाबा पुलिस की पकड़ में आ गए हैं। इनमें कारी अब्दुल रहमान भी शामिल है, जो जादू-टोना और दुआ के नाम पर लोगों को डराकर ठग रहा था।
एसएसपी देहरादून बोले: “बहरूपिए चाहे किसी भी धर्म से हों, पाखंड करेंगे तो सलाखों के पीछे जाएंगे। देवभूमि को ठगों का अड्डा नहीं बनने देंगे।”

कारी अब्दुल का काला खेल खत्म!
विकासनगर इलाके में पुलिस ने कारी अब्दुल रहमान को दबोच लिया।
उसका दावा था —
“हर बीमारी का इलाज मेरे पास है… दैवीय प्रकोप भी मैं टाल दूंगा।”
लेकिन पुलिस की गिरफ्त में अब उसका कोई टोना-टोटका काम न आया। उसके जादू के धंधे पर ताला लग चुका है।
पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी के बाबा भी गिरफ्तार
इन 29 ढोंगी बाबाओं में 20 आरोपी दूसरे राज्यों से देहरादून आए थे।
- कोई खुद को तांत्रिक बता रहा था,
- कोई जड़ी-बूटी वाला वैद्य,
- तो कोई चमत्कारी बाबा।
ये लोग खासकर महिलाओं और युवाओं को अपनी बातों में फंसा रहे थे। निजी परेशानियों का हल, नौकरी का जुगाड़, बीमारियों का इलाज — सब कुछ इनके पास “दवाई” या “ताबीज़” के नाम पर बिक रहा था।

अतिक्रमण पर भी गिरी गाज, ढोंगी दम्पत्ति गिरफ्तार
प्रेमनगर में पुलिस ने सड़क किनारे बने फर्जी दवाखाने पर छापा मारा।
यह दवाखाना चला रहे थे —
- विनोद सिंह और उसकी पत्नी राधा, निवासी रोशनाबाद, हरिद्वार।
ये लोग दावा कर रहे थे कि हर बीमारी का शर्तिया इलाज उनके पास है। लेकिन पुलिस ने जब दस्तावेज मांगे — सब फर्जी निकला।
“हमारे पास इलाज है… बस फीस जमा कराओ!” — इतना ही इनका धंधा था।
दवाखाना सील कर दिया गया। दम्पत्ति सलाखों के पीछे भेज दिए गए।
देवभूमि को पाखंडमुक्त करने का संकल्प
एसएसपी देहरादून ने साफ कहा —
“कोई भी बाबा, तांत्रिक, या वैद्य — जो धर्म की आड़ लेकर लोगों को ठग रहा है, वह बच नहीं पाएगा। ऑपरेशन कालनेमि चलता रहेगा।”
देवभूमि में आस्था की डगर पर पाखंडियों के कांटे बिछाने वालों के लिए यह सीधी चेतावनी है।
सोचिए…
जिस देवभूमि की पहचान शुद्ध आस्था और spirituality से है, वहाँ अगर झाड़-फूंक और डर के नाम पर लोगों को लूटा जाएगा — तो उसका जिम्मेदार कौन? ऑपरेशन कालनेमि ने इन सवालों को एक बार फिर सबके सामने ला खड़ा किया है।
आस्था जरूरी है, लेकिन आँखें बंद कर भरोसा करना नहीं।
