प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में बॉर्डर विलेज का जिक्र बार-बार आ रहा है और उसमें भी सबसे ज्यादा वाइब्रेंट विलेज का नाम चर्चाओं में है
चर्चा इस बात को लेकर है कि चीन सीमा पर बसा हुआ माना अब अंतिम गांव नहीं बल्कि प्रथम गांव बन गया है ,
मायने साफ है कि सरकार बॉर्डर इलाकों में पर विशेष ध्यान दे रही है और इसी के चलते बार-बार केंद्रीय केंद्रीय मंत्रियों के दौरे उत्तराखंड के सीमावर्ती गांव में हो रहे हैं
चर्चा इस बात को लेकर भी है कि इन गांव के विकास के लिए एक मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसे वाइब्रेंट विलेज मॉडल कहां जा रहा है
इसके लिए मॉडल के तौर पर किसी भी एक सीमावर्ती गांव का चयन किया जाना है पर क्या इसके लिए उत्तराखंड के किसी सीमावर्ती गांव का चयन होगा ? क्या चमोली के माना का पिथौरागढ़ के किसी गांव का अथवा उत्तरकाशी के हरसिल घाटी का ?
मंत्रियों के बार-बार के दौरे बता रहे हैं कि वह सीमा पर स्थित गांव के लिए कितना चिंतित हैं वहीं अगर पर्यटन कांसेप्ट की बात करें तो एक तरफ पाठकों को इजी एप्रोच के जरिए स्टेशन तक पहुंचाना और वही सीमांत और अब तक पिछड़े माने गए गांव का विकास करना दोनों अलग-अलग थीम पर आधारित है अगर बॉर्डर बीहड़ होगा तो प्राकृतिक खूबसूरती होगी लेकिन वहां पहुंचना आसान नहीं होगा और जहां पहुंचना आसान होगा वहां बॉर्डर भले हो सकता है लेकिन प्राकृतिक खूबसूरती नहीं होगी
अब केंद्र सरकार वाइब्रेंट विल्लेज के नाम पर सभी बॉर्डर एरिया को डिवेलप करेगी लेकिन इसमें समय लगेगा अब देखना यह दिलचस्प होगा मॉडल विलेज के रूप में किस बॉर्डर गाँव का चयन होता है बार-बार चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जिले के हारशील घाटी में मंत्रियों को दौरे के बाद हमने बीजेपी के जिला अध्यक्ष सत्येंद्र राणा से बातचीत की आप भी देखिये कि वह कितने कॉन्फिडेंट हैं कि चीन सीमा पर लगे उत्तरकाशी में ही मॉडल विलेज बनेगा
