“रैम्प से व्हीलचेयर तक… हर सुविधा होगी मुहैया, हर वोट बनेगा ताकत!”
देहरादून।
“लोकतंत्र में हर आवाज़ जरूरी है — चाहे वो धीमी ही क्यों न हो।”
इसी जज़्बे के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने साफ कहा है — ‘दिव्यांग मतदाता अब किसी कतार में पीछे नहीं रहेंगे।’
हर तीन महीने बनेगी नई लिस्ट, कोई दिव्यांग छूटे नहीं!

गुरुवार को सचिवालय में हुई स्टेट स्टेयरिंग कमेटी ऑन एक्सेसिबल इलेक्शन की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने समाज कल्याण विभाग को आदेश दिए कि हर तीन महीने में दिव्यांग मतदाताओं की नई सूची तैयार की जाए।
“दिव्यांग पेंशनधारक हों या अन्य, सबका नाम वोटर लिस्ट में आएगा, ताकि कोई वोट से वंचित न रहे।”
— डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी
हर बूथ पर दिव्यांगजनों के लिए स्पेशल सुविधाएं
बैठक में निर्देश दिए गए कि हर पोलिंग बूथ पर रैम्प, व्हील चेयर, पीने का पानी, टॉयलेट, शेड और बैठने की सुविधाएं अनिवार्य होंगी।
“हमारा मकसद सिर्फ वोट डालवाना नहीं, बल्कि दिव्यांग वोटरों को इज़्ज़त और सहूलियत दोनों देना है।”
— डॉ विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी
दिव्यांग वोटरों को मिलेगा नया पहचान — PWD आइकॉन!
जिलों में PWD आइकॉन चुने जाएंगे जो लोगों को जागरूक करेंगे कि वोट डालना अधिकार ही नहीं, सम्मान भी है।
NIepvd को ब्रेल में वोटर अवेयरनेस सामग्री तैयार करने का आदेश दिया गया है, ताकि दृष्टिबाधित मतदाता भी आत्मनिर्भर बन सकें।
30-39 साल के दिव्यांग सबसे ज्यादा, अब बदलेंगे हालात
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खुलासा किया कि राज्य में 30-39 उम्र के दिव्यांग सबसे ज्यादा हैं।
“ये वही उम्र है जब ज़िन्दगी की रफ़्तार तेज होती है। इनकी भागीदारी लोकतंत्र में उतनी ही अहम है, जितनी किसी और की।”
— डॉ विजय कुमार जोगदंडे
सवाल अब हम सबसे — क्या लोकतंत्र सच में सबका है?
बैठक में समाज कल्याण, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, सूचना, और कई NGOs ने हिस्सा लिया। हर किसी का मकसद एक ही था — दिव्यांग वोटर को वो हक देना, जो उनका है।
“लोकतंत्र की असली जीत तभी होगी… जब हर वोटर, हर बूथ तक बेखौफ और बिना मुश्किल पहुँच सके। सोचिए — क्या आपका वोट अकेला काफी है… या किसी और की आवाज़ भी सुननी चाहिए?”
