देहरादून में चोरी की वारदातों से कांप उठे लोग… 3 लाख की ज्वैलरी बरामद, साथी की तलाश जारी!
देहरादून में उस रात हवा में सन्नाटा नहीं… साजिश तैर रही थी!
रेल पटरी किनारे मंडराता एक साया… और फिर बंद घरों पर शातिर वार।
लेकिन इस बार किस्मत ने दून पुलिस का साथ दिया।
डोईवाला पुलिस ने उस साये को दबोच लिया, जो पंजाब से आकर देहरादून में चोरी का तांडव कर रहा था।

“रेल पटरी से शुरू होती थी वारदात की कहानी…”
पकड़ा गया आरोपी है गौरव कुमार वर्मा, उम्र 36 साल।
जो अमेठी (उ.प्र.) का रहने वाला है, लेकिन फिलहाल पंजाब के लुधियाना में डेरा जमाए हुए था।
“ये कोई आम चोर नहीं, रेलवे पटरी किनारे रात में घूमकर बंद घरों को निशाना बनाता था। पुलिस को चकमा देने के लिए लोकेशन बदलता रहता था।”
— पुलिस अधिकारी
तीन घर, तीन ताले टूटे… तीन लाख की ज्वैलरी गायब!
- घटना 1 — चांदमारी में अंकित सिंह के घर ताला टूटा, ज्वैलरी उड़नछू।
- घटना 2 — यशपाल सिंह छुट्टियों से लौटे तो घर में सिर्फ खाली आलमारी मिली।
- घटना 3 — केशवराम का परिवार रिश्तेदारी से लौटा, मगर घर में लुटी हुई ज्वैलरी की तस्वीर।
तीनों ही घटनाओं में चोरी गई ज्वैलरी की कीमत 3 लाख रुपये से ज्यादा।
“हम गांव गए थे… लौटे तो जिंदगी भर की पूंजी लुट चुकी थी!”
— एक पीड़ित परिवार
“पंजाब से देहरादून तक फैला नेटवर्क”
गौरव कोई नौसिखिया चोर नहीं…
उसके खिलाफ पंजाब और उत्तराखंड के थानों में सात से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
हर जगह उसका एक ही तरीका —
- रेलवे पटरी के किनारे से रास्ता पकड़ो
- बंद घरों की रैकी करो
- मौका मिलते ही ताले तोड़कर घर साफ़ कर दो!
“ये गिरोह बेहद शातिर है। चोरी के बाद तुरंत शहर बदल देते हैं।”
— कोतवाली डोईवाला पुलिस
कैसे चढ़ा पुलिस के हत्थे?
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
रेलवे स्टेशन रोड, हर्रावाला पर गश्त के दौरान मुखबिर से मिली टिप।
और आखिरकार —
गौरव कुमार वर्मा पुलिस के शिकंजे में आ गया।
उसके पास से तीनों वारदातों की ज्वैलरी बरामद हुई।
अब उसका दूसरा साथी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
“चोरी कोई जुर्म नहीं… ये इंसान के सपनों की हत्या है!”
डोईवाला की गलियों में आज भी लोग सहमे हुए हैं।
कोई अपने ताले दो बार चेक कर रहा है… कोई सीसीटीवी लगाने की सोच रहा है।
लेकिन असली सवाल यही है —
“कब तक चंद शातिर लोग… मेहनतकश लोगों की जिंदगी लूटते रहेंगे?”
सोचिए… क्योंकि अगली बारी किसी का भी घर हो सकता है!
