उत्तरकाशी में आफत बनी बारिश – 20 मजदूरों को बचाया गया, लापता मजदूरों के परिजनों की चीख-पुकार, यमुनोत्री हाईवे पर भी भूस्खलन से तबाही
ओपनिंग (Hook)
“काले बादल बरसे… और पहाड़ मानो आकर लोगों पर टूट पड़े। चीख-पुकार, मलबा, और जिंदगी-मौत की जंग… उत्तरकाशी के सिलाई बैंड में बारिश ने रविवार सुबह ऐसा तांडव मचाया कि दो मजदूरों की जान चली गई, जबकि सात अब भी मलबे के नीचे दबी सांसों के लिए जंग लड़ रहे हैं।”
मलबा, चीखें और टूटती उम्मीदें…
तहसील बड़कोट के अंतर्गत सिलाई बैंड के पास रविवार तड़के पहाड़ दरक गया। उस वक्त वहां 29 मजदूर रह रहे थे। कुछ सेकंड में सबकुछ मलबे में दब गया।
20 मजदूर किसी तरह बचा लिए गए, लेकिन दो की लाशें निकाली जा चुकी हैं। और 7 मजदूर अब भी लापता हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी जिंदगी की बाज़ी
घटना की खबर मिलते ही डीएम प्रशांत आर्य कंट्रोल रूम पहुंचे। उन्होंने SDRF, NDRF, पुलिस और डॉक्टरों की टीम को फौरन रवाना किया।
“हम पूरी ताकत लगा रहे हैं। कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हर मजदूर को खोजकर ही दम लेंगे।” – जिलाधिकारी प्रशांत आर्य
मलबा हटाने और लापता मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।

बरसात ने बंद कर दीं देवभूमि की सड़कें
बारिश का कहर सिर्फ सिलाई बैंड तक नहीं रुका। यमुनोत्री नेशनल हाईवे भी कई जगह धंसा पड़ा है।
पालीगाड़, कुथनौर, झज्जरगाड़ – हर जगह मलबा गिरा है। 5 जेसीबी, पोकलेन और ट्रॉला मशीनें मलबा हटाने में लगी हैं।
गंगोत्री हाईवे पर लालढांग, नलुणा और डबराणी में रास्ता खोल दिया गया है, लेकिन यात्रियों में डर कायम है।
“अब तक का सबसे डरावना हादसा…”
स्थानीय लोगों की आंखों में खौफ है। पीलीभीत के 55 साल के दूजेलाल और नेपाल के केवल विष्ट की मौत ने गांव में सन्नाटा फैला दिया है।
लापता मजदूरों की लिस्ट देख घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
“भैया की आवाज़ तक नहीं आ रही… बस भगवान से दुआ कर रहे हैं कि जिंदा निकाल लो।” – लापता मजदूर के रिश्तेदार की चीख
ये हैं लापता मजदूरों के नाम
- रोशन चौधरी (37), नेपाल
- अनवीर धामी (40), नेपाल
- कल्लूराम चौधरी (60), नेपाल
- जयचंद उर्फ बॉबी (38), देहरादून
- छोटू (22), देहरादून
- प्रियांश (20), देहरादून
- सर कटेल धामी (32), नेपाल
धाम यात्रियों को भी सुरक्षित किया गया
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में आए यात्रियों को सुरक्षित ठहराया गया है। पेयजल और जरूरी सामान की आपूर्ति जिला प्रशासन करवा रहा है।
अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र और एसडीएम बृजेश तिवारी मौके पर राहत और बचाव का निरीक्षण कर रहे हैं।
“बारिश तो रुक जाएगी… मगर इन पहाड़ों की कोख में दबी सात ज़िंदगियों की तलाश अभी बाकी है। उत्तरकाशी की वादियां आज सिर्फ हरियाली नहीं, आंसुओं से भी भीगी हैं।”
