“बरसात बना कहर! केदारनाथ यात्रा पर संकट, मलबा-चट्टानें रोक रहीं रास्ता – राहत टीमों की चुनौती बढ़ी”

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रुद्रप्रयाग में पहाड़ दरके, सड़कें मलबे में दबीं… यात्रियों की सांसें अटकीं!

उत्तराखंड में आसमान से बरस रही आफत ने रुद्रप्रयाग में हालात बिगाड़ दिए हैं। तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही मूसलधार बारिश ने पहाड़ों को इस कदर कमजोर कर दिया कि जगह-जगह मलबा और पत्थर टूटकर सड़कों पर गिर रहे हैं।

सबसे ज्यादा असर पड़ा है केदारनाथ यात्रा मार्ग पर।

रात की तेज बारिश ने सोनप्रयाग इलाके को खतरनाक बना दिया। हनुमान मंदिर, शटल पुल और मुनकटिया के पास बार-बार मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिर रहे हैं। कभी रास्ता खुलता है, तो कभी दोबारा बंद हो जाता है।

“रातभर बारिश होती रही। हर थोड़ी देर में पत्थर गिरते सुनाई दिए। डर लग रहा था कि कहीं सबकुछ धस ना जाए।”
स्थानीय निवासी, सोनप्रयाग

प्रशासन की ओर से तत्काल जेसीबी मशीनें, राहत टीमें और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। मलबा हटाने का काम लगातार जारी है, लेकिन बारिश हर कोशिश पर पानी फेर रही है।

एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें रात-दिन डटी हुई हैं। एक-एक पल पर नजर रखी जा रही है कि कहीं कोई और हादसा न हो जाए।

उधर, ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भी सिरोबगड़ के पास चट्टानें गिरने से दो जगह रास्ता बंद हो गया। लोक निर्माण विभाग की मशीनें और मजदूर युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं।

“हमारी पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द सड़कें खोल दी जाएं, ताकि लोगों को राहत मिले और चारधाम यात्रा सुचारू हो सके।”
प्रशासनिक अधिकारी, रुद्रप्रयाग

यात्रियों और स्थानीय लोगों में डर और बेचैनी साफ झलक रही है। होटल और घरों में लोग रातभर जागते रहे, ताकि कोई हादसा न हो।

ये सिर्फ मलबे का नहीं, बल्कि हौसलों की भी परीक्षा है।

👉 सोचिए, जब हर रास्ता मलबे से बंद हो जाए, तब इंसान को कितना छोटा महसूस होता है… प्रकृति के आगे कोई नहीं टिकता।

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