आधुनिक तकनीकी से लीसे में करोड़ो का राजस्व बिना पेड़ो को नुकसान किये, प्रशिक्षण सुरु

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प्रशिक्षण की बदौलत सरकार को हो रहा करोड़ों का राजस्व , वन प्रभागीय अधिकारी मीणा दे दिया प्रशिक्षण।

अमित कंडियाल, ऋषिकेश

उत्तराखंड सरकार को हर साल चीड़ के पेड़ों से निकलने वाले लीसा से करोड़ों रुपए के राजस्व की प्राप्ति होती है लेकिन तकनीकी रूप से प्रशिक्षित न होने के कारण वन विभाग के कर्मचारी और ग्रामीणों की ओर से लीसा निकालने के तहत चीड़ के पेड़ों को जाने अनजाने नुकसान पहुंचाया जा रहा था। चीड़ के पेड़ों को नुकसान से बचाने के लिए नरेंद्रनगर वन प्रभागीय अधिकारी धर्म सिंह मीणा की ओर से विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों को बोर – होल पद्धति से चीड़ के पेड़ों से लीसा निकाले जाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पद्धति से एक तरफ तो भारी मात्रा में लीसा की प्राप्ति होती है। तो वहीं चीड़ के पेड़ों को काफी कम मात्रा में नुकसान पहुंचता है और वृक्षों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।

वहीं जानकारी देते हुए नरेंद्रनगर वन प्रभागीय अधिकारी धर्म सिंह मीणा ने बताया कि वर्तमान में चीड़ के वृक्षों से रील पद्धति से संपूर्ण उत्तराखंड में लीसा निकाला जाता है। यह तकरीबन डेढ़ लाख टन लीसा होता है , जो प्रतिवर्ष निकलता है। जिसका गवर्नमेंट को तकरीबन 70 से 80 करोड़ का रेवेन्यू प्राप्त होता है। 45 सेंटीमीटर लम्बाई 30 सेंटीमीटर चौड़ाई का छाल को छीलकर हब बनाया जाता हैं और उसमें 32 रील बनती है , उससे लीसा निकाला जाता हैं। यह प्रत्येक 5 साल में पेड़ के हर तरफ से लीसा निकाला जाता हैं।

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