दूर पहाड़ों में माँओं की सांसों पर मंडरा रहा खतरा, प्रशासन ने कसी कमर
मेरु रैबार ब्यूरो उत्तरकाशी
“एक और बारिश… और कहीं कोई माँ न खो दे अपनी जान या कोख का सपना!” — इस डर और चुनौती के बीच जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने दूरदराज की ऊँचाईयों पर रहने वाली गर्भवती महिलाओं को बचाने के लिए बड़ा एक्शन प्लान शुरू कर दिया है।
मानसून की मार और उफनती नदियों के बीच दुर्गम गाँवों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की जान पर हर पल खतरा मंडरा रहा है। डीएम आर्य ने सोमवार को सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ कहा —
“प्रशासन का लक्ष्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और इस चुनौतीपूर्ण समय में गर्भवती महिलाओं और नवजातों को सुरक्षित रखना है।”

हर गाँव तक पहुंचेगी मदद, पल-पल की होगी निगरानी
- आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की टीमें अब पहाड़ों पर चढ़कर घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की स्थलीय जानकारी और डेटा इकट्ठा करेंगी।
- किसी भी इमरजेंसी में सूचना फौरन ऊपरी अधिकारियों तक पहुँचाई जाएगी।
- हर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी दवाइयाँ, एम्बुलेंस और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ तैनात रहेंगे।
“जंगल, बारिश, टूटती सड़कें… पर माँओं की जान नहीं जाएगी दांव पर”
डीएम आर्य ने चेताया —
“मानसून में सड़कें टूट सकती हैं, गांवों का संपर्क कट सकता है। हमें हर हाल में वैकल्पिक व्यवस्था रखनी होगी ताकि जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को तुरंत बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट किया जा सके।”
एक माँ की कहानी, जो दिल को छू जाए
मोरी ब्लॉक की गीता देवी कहती हैं,
“बारिश में हमारी जान सांसत में होती है। कहीं फिसलन, कहीं नदी उफन जाती है। डर लगता है कि वक्त पर अस्पताल पहुँच भी पाऊँगी या नहीं…”
लेकिन अब प्रशासन का यह भरोसा गीता जैसी अनगिनत महिलाओं के चेहरों पर उम्मीद लौटा रहा है।
खतरा बड़ा है, लेकिन जज्बा उससे भी बड़ा…
बरसात का पानी भले पहाड़ काट दे, लेकिन पहाड़ की इन माँओं की हिम्मत और प्रशासन का संकल्प टूटने वाला नहीं।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक जान का नहीं… सवाल है आने वाली नस्लों की जिंदगी का।Tools
