सजीवन बूटी लेकर जा रहे हनुमान के हाथ से यहा गिरि थी बूटी

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श्री कृष्णजमाष्टमी के मौके पर चमोली जिले के मन्दिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी , जिलासु तहशील के गिरसा गांव में स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी रही , यहां दूर दूर से आये लोगो ने पूजा अर्चना की और कीर्तन भजन किये , मन्दिर के पुजारियों ने बताया कि इस बार कोरोना महामारी के चलते मन्दिर के कार्यक्रम को सीमित किया गया है ।


भारत देश त्योहारो एवं आयोजनों का देश है । यहां मनाए जाने वाले त्यौहारों में प्रमुख है कृष्णजमाष्टमी का त्योहार , कान्हा के जन्म दिन पर यहां श्री कृष्ण के मंदिरों में इस पर्व को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है ।

चमोली जिले के जिलासु तहसील के अंतर्गत गिरसा गांव में आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा 8वीं शताब्दी में स्थापित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर स्थिति है । इस गांव व यहां के मंदिर को लेकर ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र प्रसाद पुरोहित बताते है कि लक्ष्मण जी पर जब शक्ति लगी थी तो हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आ थे ,रास्ते में भरत जी ने देखा कि ये बिशालकाय चीज क्या है तो भरत ने तीर चला दिया जिससे उस पर्वत से कुछ मिट्टी के अंश गिर गए इसलिए इस गांव का नाम गिरसा पड़ गया और जिस स्थान पर वह मिट्टी गिरी वहां पर मिट्टी का एक बिशाल टीला बना गया जिस पर की 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा भगवान श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की स्थापना की गई , मन्दिर के समीप यहां अलकनन्दा नदी के किनारे एक बिशाल भरत गुफा भी है । बताया जाता है कि यहां भरत ने इस गुफा के अंदर तपस्या की थी , श्री कृष्णजमाष्टमी के मौके पर आज भगवान लक्ष्मीनारायण के इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही , दूर दूर से यहां पहुचे भक्तों ने अपने मन की मुराद पूरी करने के लिए यहां कान्हा की पूजा अर्चना और कीर्तन भजन किये
राजेन्द्र प्रसाद पुरोहित ज्योतिषाचार्य
विजय प्रसाद सती पुजारी

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