देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित उत्तराखंड की ऐतिहासिक भव्य रामलीला महोत्सव-2026 के आठवें दिन को ‘कामगार दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। रामलीला में रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति और मेघनाद वध के प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। आधुनिक लेजर और डिजिटल तकनीक से सजे दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कामगार दिवस के अवसर पर देहरादून की परिवहन व्यवस्था, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य जनसेवाओं से जुड़े कर्मयोगियों के योगदान को सम्मान देने का संदेश दिया गया। ऑटो यूनियन, विक्रम यूनियन, स्कूल वैन एसोसिएशन और नगर निगम कर्मचारी एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों की भूमिका को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन मेहनतकश लोगों के परिश्रम और सेवाभाव से शहर की दैनिक व्यवस्थाएं सुचारु रहती हैं। ऐसे में उनके योगदान का सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में गढ़वाली फिल्मों के अभिनेता और लोकगायक सौरभ मठाणी की शानदार प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। उनके लोकप्रिय गढ़वाली गीतों ने रामलीला मैदान में लोकसंगीत का रंग जमा दिया। दर्शक गीतों की धुन पर झूमते और नाचते नजर आए। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति ने माहौल को उत्साह और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के भव्य सांस्कृतिक आयोजन समृद्ध परंपराओं को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को संस्कृति एवं धार्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को आधुनिक तकनीक के साथ भव्य स्वरूप में प्रस्तुत करना सराहनीय प्रयास है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि समाज के निर्माण में योगदान देने वाले कामगारों, श्रमिकों और विभिन्न जनसेवी संगठनों का सम्मान किया जाना चाहिए। परिवहन, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य जनसेवाओं को सुचारु रखने वाले कर्मयोगियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उनके परिश्रम और समर्पण को सम्मान देना सराहनीय पहल है।
रामलीला समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून का उद्देश्य पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक के माध्यम से देशभर के दर्शकों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। दर्शकों के इसी स्नेह से प्रेरित होकर वर्ष 2026 में एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। थापर ने कहा कि रामलीला के साथ कामगार दिवस मनाने का उद्देश्य भगवान श्रीराम के कर्म, कर्तव्य और सेवा के आदर्शों को मेहनतकश लोगों के सम्मान से जोड़ना है। ऑटो यूनियन, विक्रम यूनियन, स्कूल वैन एसोसिएशन, नगर निगम कर्मचारी एसोसिएशन और अन्य जनसेवी संस्थाओं से जुड़े कर्मयोगियों का सम्मान करना सामाजिक जिम्मेदारी है।
वर्ष 1952 में पुरानी टिहरी से शुरू हुई ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। समिति की ओर से इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पारंपरिक रामलीला में आधुनिक लेजर और डिजिटल तकनीक का समावेश आयोजन को विशिष्ट पहचान प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम में पत्रकार राहुल कोटियाल, डॉ. राकेश भट्ट, भूपेश धवन, ऑटो यूनियन देहरादून के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, विक्रम यूनियन देहरादून के महामंत्री संजय अरोड़ा, समाजसेवी सुशील बहुगुणा, अनुपम नागालिया और नई टिहरी रामलीला समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल सहित समिति के सदस्य और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समिति ने सभी अतिथियों, कलाकारों, कामगारों, यूनियनों, संस्थाओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और समाज के प्रत्येक वर्ग के योगदान का सम्मान महोत्सव की भावना का अभिन्न अंग है।
समिति की ओर से बताया गया कि रामलीला महोत्सव 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन तथा 21 अक्टूबर को श्रीराम का राजतिलक होगा। इसके अतिरिक्त 8 से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में मेले का आयोजन किया जा रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं और नगरवासियों से सपरिवार पहुंचकर इस ऐतिहासिक आयोजन का आनंद लेने की अपील की है।

