आपदा का मंजर, राहत का मिशन: टिहरी में आपदा क्षति आंकलन को लेकर हाई-लेवल मीटिंग 🌧️

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⛈️ बारिश का कहर, पहाड़ का दर्द
अगस्त की लगातार बरसात ने टिहरी गढ़वाल को जख्म दिए हैं—सड़कें टूटी, दीवारें गिरीं, पाइपलाइनें फट गईं, और गांव मलबे में दब गए। इस तबाही के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने बुधवार, 13 अगस्त को जिला सभागार में आपदा से हुई क्षति का विभागवार आंकलन किया।


मैदान से मिली दर्दनाक रिपोर्ट
बैठक में जो तस्वीर सामने आई, वो चौंकाने वाली थी—

  • 136 पाइपलाइन टूटीं, कई गांवों में पानी की आपूर्ति ठप
  • सड़कें बह गईं – सिर्फ पीएमजीएसवाई चंबा की 11 सड़कें स्लिप से बंद
  • 27 स्कूल क्षतिग्रस्त, बच्चों की पढ़ाई पर खतरा
  • नरेंद्रनगर में 10 नहरें टूटीं, खेती पर संकट
  • घरों के पास पुश्ते गिरे, सैनिक विश्राम गृह के पास स्लिप
  • वन विभाग की नर्सरी और चेकडैम तबाह

“हम हर नुकसान की सटीक तस्वीर तैयार कर रहे हैं, ताकि राहत और मरम्मत का काम तुरंत शुरू हो सके”नितिका खण्डेलवाल, जिलाधिकारी टिहरी


🚨 त्वरित कार्रवाई के आदेश
जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को जियो-टैग फोटो के साथ रिपोर्ट देने को कहा और चेतावनी दी कि कोई भी प्रभावित स्थान बिना निरीक्षण के रिपोर्ट में न छोड़ा जाए।
भारत सरकार की टीम जल्द ही इन इलाकों का दौरा करेगी।


💔 पहाड़ का दर्द, लोगों की उम्मीदें
घरों में मलबा, खेतों में पानी, टूटी सड़कों से कटा आवागमन—लेकिन उम्मीद अब भी जिंदा है। क्योंकि प्रशासन ने वादा किया है—“पहुंचेंगे, देखेंगे, और मदद करेंगे।”


👉 ये सिर्फ एक बैठक नहीं थी, ये पहाड़ के जख्मों को भरने की शुरुआत थी। सवाल है—क्या राहत का ये मिशन तबाही के निशान मिटा पाएगा?

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