हिमाचल कांग्रेस के दिग्गज वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सीएम नहीं बन पाई .
मुकेश अग्निहोत्री भी मन मसोस कर रह गए, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि सुखविंदर सिंह सुक्खू बाजी मार गए .
पिछले 48 घंटे हिमाचल कांग्रेस में कोहराम भरे रहे, 21 विधायकों का बैठक में न आना , मंडी में लोकसभा उपचुनाव कराने से डरना, पर्यवेक्षकों का नारेबाजी से सामना ये सब सवाल है जो एक कहानी तैयार कर रहे थे
सुखविंदर के सीएम बनने से पहले पर्दे के पीछे क्या क्या चल रहा था? यह सब इसी कहानी का हिस्सा है , हिमाचल में लंबी राजनीतिक हलचल के बाद आखिर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री तय कर दिया है लिहाजा सुक्खू राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे और मुकेश अग्निहोत्री को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है लेकिन विधान सभा चुनाव जितने से लेकर सीएम बनने तक खुद को लेकर की गई उनके बयान बाजी खूब चर्चा में है और दिलचस्प भी रही है . चुनाव परिणाम से ठीक पहले तक सुक्खू यही कहते रहे कि मैं रेस में नहीं , लेकिन परिणाम आए तो जीत जबरदस्त हुई . इसके बाद जब कांग्रेस की तरफ से सीएम घोषणा की बारी आई तो वे कहते रहे कि मुझे असली बात की कोई जानकारी नहीं है और ना ही मैं सीएम पद की रेस में हूं, मैं तो एक सामान्य विधायक हूं और पार्टी का एक मामूली सा कार्यकर्ता हूं लेकिन अंत में वही सीएम बने.
सुखविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर जिले के नादोंन से पांचवी बार विधायक चुनकर आए हैं और इसी के साथ अब हिमाचल के मुख्यमंत्री बन गए हैं हिमाचल विधानसभा चुनाव के परिणाम से लेकर सुखविंदर सिंह के सी एम बनने तक की कहानी बड़ी रोचक है . सीएम के लिए सुखविंदर सुकू सहित छह लोगों के नाम चर्चाओं में थे . 8 दिसंबर को चुनाव परिणाम के बाद अब 9 दिसंबर को विधायक दल की बैठक 1 घंटे तक चली इस बैठक में सुक्खू प्रतिभा सिंह और मुकेश अग्निहोत्री सहित छह नाम सीएम पद के लिए चर्चा में थे लेकिन किसी पर सहमति नहीं बन सकी .
चुनाव परिणाम के बाद शुक्रवार को होने वाली इस बैठक को 3:00 बजे होना था लेकिन सुखविंदर समेत २१ विधायक रात 7:30 बजे तक पार्टी कार्यलय नहीं पहुचे 8:00 बजे तक यहां इक्का-दुक्का विधायक जुटना शुरू हो गए . 3:00 बजे का समय तय होने के बाद रात 8:00 बजे होने वाली इस बैठक की देरी से होने की वजह CM फेस के दो प्रमुख दावेदार प्रतिभा सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू ही थे . दोनों नेताओं के समर्थक कांग्रेस भवन के बाहर नारेबाजी करने लगे और नारेबाजी करते हुए ही आपने अपने नेताओं को सीएम बनाने की मांग करने लगे . इस बीच जैसे ही भूपेश बघेल की गाड़ी यहां पहुंचे तो दोनों नेताओं के समर्थक नारेबाजी करते रहे और आब्जर्वर की गाड़ी तक को रोक दिया लेकिन सुक्खू अभी भी यहां से गायब थे उनका फोन भी बंद आ रहा था अंत में सीएम का नाम तय करने का वक्त आया तो इसके लिए हाई कामन को तय करने के लिए सिंगल लाइन का प्रस्ताव पारित कर दिया गया
प्रतिभा सिंह सीएम रेस में सबसे पहले नंबर पर थी उन्हें 18 विधायकों का समर्थन भी था लेकिन फिर भी सुक्खू सीएम बने. विधायकों का कहना था कि सीएम को विधायक ही होना चाहिए क्योंकि प्रतिभा सिंह वर्तमान में मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं और मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ेगा और ऐसे में दो उप चुनाव करवाने पड़ेंगे. एक मंडी में सांसद के लिए और दूसरे में प्रतिभा सिंह के मुख्यमंत्री बनने के लिए विधायक का. दरअसल कांग्रेस के लिए मंडी सीट से सांसद के लिए उपचुनाव करना खतरे से खाली नहीं था क्योंकि मंडी की 10 में से बीजेपी ने विधानसभा में 9 सीटें जीती और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा लिहाजा कांग्रेस कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी , जबकि सुक्खू ने अपने इलाके में 5 में से 4 सीटें कांग्रेस की झोली में दाल दी थी , एक सीट निर्दलीय आशीष शर्मा ने जीती उसके भी कांग्रेस में आने के चर्चा है .
वैसे भी ये अच्छा संदेश नहीं जाता अगर मंडी से चुनाव ना जिता पाने वाले प्रतिभा को सीएम बना दिया जाता , आपको बता दें कि मुख्यमंत्री का चेहरा हाईकमान से तय करने का प्रस्ताव मुकेश अग्निहोत्री ने रखा था सुकू ने इसका समर्थन किया था जिसके मुताबिक यह तय किया गया था कि सीएम के लिए जो भी फैसला हाईकमान लेगा वह तय माना जाएगा . लिहाजा अब सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल के मुख्यमंत्री और मुकेश अग्निहोत्री उप मुख्यमंत्री होंगे
