🚨 SUPER BREAKING | उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय
अब हर सबूत की होगी परत-दर-परत जांच
काठगोदाम।
जब किसी केस में सवाल ज़्यादा हों…
जब परिवार इंसाफ की आस लगाए बैठा हो…
और जब पूरे प्रदेश की निगाहें एक जांच पर टिकी हों…
तब मैदान में उतरते हैं SIT चीफ खुद।

सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में
SIT प्रमुख और IG STF नीलेश आनंद भरणे
आज अपनी पूरी टीम के साथ काठगोदाम पहुंचे
और क्राइम सीन का खुद निरीक्षण किया।
🔍 सबूतों की घेराबंदी, कोई छेड़छाड़ नहीं
SIT चीफ ने साफ निर्देश दिए—
📌 ऊधमसिंहनगर पुलिस कार्यालय
📌 थाना ITI
📌 चौकी पैगा
📌 और अन्य सभी संबंधित शाखाओं में मौजूद
हर दस्तावेज, हर फाइल, हर सबूत को संरक्षित किया जाए।
“सबूतों की सुचिता से कोई समझौता नहीं होगा” —
SIT चीफ नीलेश आनंद भरणे
🛑 पीड़ित परिवार से स्थानीय पुलिस का संपर्क बंद
इस मामले में सबसे बड़ा और अहम फैसला—
❌ स्थानीय पुलिस को
❌ पीड़ित परिवार या गवाहों से
❌ किसी भी तरह का अनावश्यक संपर्क करने से रोक दिया गया है।
क्योंकि सवाल सिर्फ जांच का नहीं…
भरोसे का भी है।
🛡️ पीड़ित परिवार की सुरक्षा अब SIT के जिम्मे
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए—
🔒 पीड़ित परिवार के घर
🔒 अन्य जनपदों से
🔒 पुलिस गार्द तैनात की जा रही है।
साफ संदेश है—
इंसाफ की राह में डर की कोई जगह नहीं।
💻 तकनीकी जांच के लिए SIT का विस्तार
अब जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगी।
तकनीकी विश्लेषण के लिए SIT में 6 नए पुलिसकर्मी जोड़े गए हैं,
जिसमें शामिल हैं—
- 3 उप निरीक्षक
- 2 हेड कांस्टेबल
- 1 कांस्टेबल (सर्विलांस सेल)
मतलब—
📱 कॉल डिटेल
📱 डिजिटल ट्रेल
📱 टेक्निकल एंगल
सब पर पैनी नजर।
📂 FIR भी शिफ्ट, जांच की दिशा बदली
SIT चीफ ने एक और बड़ा फैसला लिया—
👉 थाना ITI में दर्ज FIR
👉 अब थाना काठगोदाम स्थानांतरित की जा रही है।
यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं…
जांच की गंभीरता का संकेत है।
👁️🗨️ पीड़ित परिवार से SIT की मुलाकात
देर शाम SIT टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
SIT चीफ ने भरोसा दिलाया—
“यह जांच भावनाओं से नहीं,
तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर होगी।
दोषी चाहे कोई भी हो, बचेगा नहीं।”
⚖️ अब सवाल सिर्फ आत्महत्या का नहीं
अब सवाल ये हैं—
❓ क्या सच पूरी तरह सामने आएगा?
❓ क्या हर एंगल की निष्पक्ष जांच होगी?
❓ और क्या सुखवंत सिंह को मिलेगा इंसाफ?
प्रदेश देख रहा है…
परिवार इंतज़ार में है…
और SIT की हर चाल अब इतिहास लिखेगी।
🛑 **इंसाफ जब खुद चलकर क्राइम सीन तक आए…
तो उम्मीद ज़िंदा रहती है।
