कीर्ति इंटर कॉलेज में समर कैंप: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कौशल का संगम

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कीर्ति इंटर कॉलेज में समर कैंप से खिल रही प्रतिभाएं

गढ़वाली-बंगाणी बोलियों से लेकर योग, संगीत और संस्कृति तक—छात्रों का बहुआयामी विकास

उत्तरकाशी, 30 मई |
पीएम श्री राजकीय आदर्श कीर्ति इंटर कॉलेज, उत्तरकाशी इन दिनों रचनात्मकता और लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर है। सात दिवसीय समर कैंप के अंतर्गत छात्र-छात्राएं न सिर्फ शिक्षा की परंपरागत विधाओं को सीख रहे हैं, बल्कि अपनी जड़ों से भी जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।

इस विशेष कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों को इक्कीसवीं सदी के कौशलों से लैस करना है, जिसमें स्थानीय भाषा, संस्कृति, संगीत, योग और रचनात्मकता के हर पहलू को शामिल किया गया है। विद्यालय परिसर में गूंजती देशभक्ति और गढ़वाली गीतों की धुनें छात्रों की आत्मा को झंकृत कर रही हैं।

गढ़वाली, बंगाणी, रंवाल्टी बोलियों में संवाद
समर कैंप में छात्र-छात्राएं गढ़वाली, बंगाणी और रंवाल्टी जैसी लोकभाषाओं में परिचय और संवाद कर रहे हैं। यह प्रयास न केवल भाषाई विविधता को सम्मान देता है, बल्कि छात्रों में भाषाई आत्मविश्वास भी पैदा कर रहा है। बंगाणी भाषा के विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुमन रावत ने विद्यार्थियों को बंगाणी शब्दों का हिंदी और अंग्रेज़ी में तुलनात्मक अध्ययन सिखाया, जिससे भाषाओं के आपसी संबंध को समझना और भी रोचक बना।

लोक संगीत और वाद्ययंत्रों का संगम
संगीत शिक्षक पंचम सिंह राणा के निर्देशन में छात्रों ने गढ़वाली गीत, भजन और लोकवाद्य जैसे ढोलक, मृदंग व अन्य वाद्ययंत्रों पर अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। छात्र न सिर्फ संगीत सुन रहे हैं, बल्कि उसे आत्मसात भी कर रहे हैं।

स्वस्थ जीवन के लिए योग
समर कैंप में योग भी प्रमुख गतिविधि रहा। छात्रों को विभिन्न योगासन, ध्यान और मुद्राओं का अभ्यास कराया गया। इससे उनमें मानसिक शांति और शारीरिक स्फूर्ति आई है।

पारंपरिक व्यंजनों का पोषण और नवाचार
संदर्भदाता डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने छात्रों को उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्यान्नों और व्यंजनों की पौष्टिकता, आर्थिक उपयोगिता और नवाचार से अवगत कराया। छात्रों ने जाना कि कैसे मंडुआ, झंगोरा, गहत जैसे अनाज आज की पोषण चुनौतियों का समाधान बन सकते हैं।

रचनात्मकता की उड़ान
शिक्षक संजय कुमार जगूड़ी और प्रभाकर सेमवाल के मार्गदर्शन में बच्चों को कहानी लेखन, चित्रकला, समूह चर्चा और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को संवारने का अवसर मिला।

प्रशासन का सराहनीय योगदान
विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेन्द्र पाल सिंह परमार ने समर कैंप के उद्देश्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह कैंप छात्रों के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खंड शिक्षा अधिकारी हर्षा रावत, शिक्षक अतुल सिंह महर, संजय सिंह राणा और सुनील सेमवाल ने भी अपने बहुमूल्य अनुभव से छात्रों को दिशा दी।

Meru Raibar के लिए यह रिपोर्ट न सिर्फ छात्रों की प्रतिभा को सामने लाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे शिक्षा में नवाचार और संस्कृति का संगम युवाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जड़ों से जुड़ा बनाता है।

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