43 गांव खतरे में! युवाओं को पलायन से रोकने के लिए रोजगार, ट्रेनिंग और हर्बल खेती का मेगा प्लान तैयार।
📰 ओपनिंग पैरा (हुक)
क्या टिहरी के वीरान होते गांव फिर से आबाद होंगे?
पलायन की त्रासदी से कराहते पहाड़ों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। जिलाधिकारी टिहरी नितिका खंडेलवाल ने मंगलवार को पलायन रोकथाम की ऐसी बैठक बुलाई, जिसे लोग “सर्जिकल स्ट्राइक ऑन पलायन” कह रहे हैं। मिशन साफ है — गांव खाली नहीं होने देंगे!
🔥 कहानी का विस्तार
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने अफसरों को दो टूक शब्दों में कहा —
“पलायन रोकना है, तो युवाओं को घर पर ही रोजगार देना होगा। सिर्फ कागज़ पर योजनाएं नहीं, ज़मीन पर रिज़ल्ट चाहिए।”
बैठक में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत 2025-26 की प्लानिंग पर मंथन हुआ। हर ब्लॉक से सुझाव मंगाए गए और साफ निर्देश दिए — योजनाओं को क्लस्टर मॉडल में जोड़ो, ताकि गांवों की तस्वीर बदल सके।

📌 पलायन के आंकड़े – चौंकाने वाले सच
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने बताया, टिहरी के 43 गांव पलायन की चपेट में हैं।
- प्रतापनगर: 14 गांव
- जाखणीधार: 09
- भिलंगना: 02
- चंबा व नरेंद्रनगर: 05-05
- कीर्तिनगर: 03
- थौलधार: 08
- जौनपुर: 04
इन गांवों के लोग रोज़गार और सुविधाओं की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं। गांव वीरान हो रहे हैं, घरों में ताले लग रहे हैं।
💥 मिशन 115 – टिहरी का गेमचेंजर?
अधिकारियों ने 115 योजनाओं का ब्लूप्रिंट रखा, जिनसे गांवों में रोजगार और आय के साधन बढ़ाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं —
✅ सोलर ड्रायर, सोलर पंप
✅ हर्बल और औषधीय खेती
✅ माइक्रो बकरी पालन, डेयरी यूनिट
✅ स्मार्ट क्लासेज, पौधारोपण
✅ पुलम (प्लम) उत्पादन, बागवानी
✅ चेक डैम, लघु सिंचाई योजनाएं
🎤 लोकल कलर, इमोशनल एंगल
टिहरी के ग्रामीणों में भी उम्मीद की लहर है। जाखणीधार की उर्मिला देवी कहती हैं —
“अगर गांव में रोज़गार मिल जाए, तो कौन छोड़ेगा अपना घर-द्वार? हमें बस ईमानदारी से काम चाहिए और सरकार का साथ।”
वहीं प्रतापनगर के रविंद्र सिंह बोले —
“हमने देखा है कैसे गांव खाली होते हैं। अब ये योजना सच हो जाए, तो हमारे बच्चों का भविष्य यहीं बन सकता है।”
👁️🗨️ अफसरों की टीम वर्क
बैठक में पीडी डीआरडीए पी.एस. चौहान, सीएओ विजय देवराड़ी, सीवीओ डी.के. सिंह, अधिशासी अभियंता बृजेश गुप्ता, बीडीओ शाकिर हुसैन, उरेडा अधिकारी एस.एस. महर समेत सभी अफसर जुटे रहे। जिलाधिकारी ने सबको अल्टीमेटम दे दिया —
“अब वक्त बातों का नहीं, काम का है!”
🔚 क्लोजिंग लाइन
टिहरी के पहाड़ आज भी बुला रहे हैं अपने बिछड़े हुए लोगों को। सवाल बस इतना है — क्या ये नई योजना वाकई गांवों में खुशहाली लौटा पाएगी, या फिर ये भी सिर्फ कागजों में दफ्न हो जाएगी? वक्त देगा इसका जवाब… और पहाड़ देख रहे हैं।
