लोक लेखा समिति के शताब्दी वर्ष सम्मेलन में स्पीकर अग्रवाल ने किया प्रतिभाग

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देहरादून। संसद भवन, नई दिल्ली में लोक लेखा समिति के शताब्दी वर्ष समारोह के द्वितीय दिवस पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने कहा की लोक लेखा समिति के शताब्दी समारोह के माध्यम से कार्यपालिका को अधिक जवाबदेह बनाने और जनकल्याण में सुधार करने के तरीकों पर चर्चा के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश एवं संसद की लोक लेखा समिति के सभापति अधीर रंजन चौधरी ने समारोह को संबोधित किया।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 4 दिसंबर को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में लोक लेखा समिति के शताब्दी वर्ष समारोह का उद्घाटन किया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा, लोकतंत्र में संसद लोगों की इच्छाओं का प्रतीक होती है और संसदीय समितियां इसके विस्तार के रूप में काम करते हुए इसे कार्यकुशल बनाती हैं। इसमें विशेष रूप से लोक लेखा समिति, विधायिका के प्रति कार्यपालिका की प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करती है। उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस दौरान कहा कि संसद को हर साल कम से कम 100 दिन और राज्य विधानसभाओं को कम से कम 90 दिन बैठक करनी चाहिए।
        लोक लेखा समिति के सौ वर्ष पूरे होने के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, संसद और सभी राज्यों के विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों का एक साझा मंच होना चाहिए। चूंकि दोनों के बीच साझे हित के अनेक मुद्दे हैं, इसलिए इनके बीच समन्वय बढ़ाने, अधिक पारदर्शिता व कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए साझा मंच होना चाहिए। इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि दो दिवसीय समारोह के दौरान 4 एजेंडों पर मुख्य रूप से वार्ता की गई जिनमें वर्तमान समय में लोक लेखा समिति का कार्यकरण, चुनौतियां और भावी कार्य योजना, लोक लेखा समिति की सिफारिशों का कार्यान्वयन, लोक लेखा समिति का प्रभाव,  लोक लेखा समिति विकास के भागीदार के रूप में विषय पर सदन में उपस्थित सभी महानुभाव के द्वारा चर्चा की गई। लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि समिति सरकारी धन की पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समिति हमेशा निष्पक्ष तरीके से काम करती है। दो दिवसीय शताब्दी समारोह के अवसर पर कार्यक्रम में सांसद, राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, राज्यों की लोक लेखा समितियों के अध्यक्ष और अन्य विशिष्ट व्यक्ति शामिल हुए। कार्यक्रम में उत्तराखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति काजी निजामुद्दीन भी मौजूद रहे।

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