“ विकास का रास्ता या गांवों की उलझन?”
टिहरी झील के नीले पानी के किनारे एक सपना बुना जा रहा है — रिंग रोड का, जो विकास की रफ्तार तेज करे। पर सवाल है, क्या ये सड़क गांवों को जोड़ने आएगी, या उनकी जड़ों को ही हिला देगी?
टिहरी गढ़वाल की जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने मंगलवार को अफसरों के साथ टिहरी झील रिंग रोड पर अहम बैठक की। मुद्दा साफ था — सड़क बनानी है, लेकिन गांवों की जमीन और गांववालों की आवाज भी सुननी है।
“विकास जरूरी है, लेकिन किसी की जायज जमीन या हक की कीमत पर नहीं,” जिलाधिकारी का दो-टूक संदेश था।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोज बिष्ट ने बताया, रिंग रोड तीन फेज में बननी है। पहला फेज कोटी कालोनी-डोबरा चांठी तक जाएगा। पर्यटन विभाग इसकी निगरानी करेगा, जबकि जमीन अधिग्रहण और निर्माण का जिम्मा लोनिवि पर होगा।
पर मुश्किल ये है — नौ गांवों के लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं। आपत्तियां आ चुकी हैं। लोग पूछ रहे हैं — “हमें मुआवजा कब मिलेगा?”
जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा, “मुआवजे की फाइल तुरंत तैयार करो। टाइमलाइन तय करो। आचार संहिता के बाद कोई देरी न हो।”
लोगों की आंखों में सवाल हैं — विकास की ये सड़क खुशहाली लाएगी, या उनकी जमीन पर सरकार का बुलडोजर?
दूसरा और तीसरा फेज — डोबरा-पीपलडाली और पीपलडाली-घनसाली — लोनिवि को ही बनाने हैं। लेकिन यहां भी लैंड एक्वायरमेंट और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की फाइलें धूल फांक रही हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आदेश दिए, “वन विभाग से समन्वय करो। नियमों के मुताबिक जमीन क्लीयर करो।”
यूटीडीबी के अफसरों ने प्रजेंटेशन दिखाया। टिहरी झील के चारों ओर 6 क्लस्टर में टूरिज्म डेवलपमेंट का प्लान तैयार है। आईएसबीटी, सिटी सेंटर, डोबरा चांठी पार्क, रोपवे… सपने बड़े-बड़े हैं।
लेकिन असली सवाल वही — “सपने सड़कों पर चलेंगे या फाइलों में ही दफ्न रह जाएंगे?”
जिलाधिकारी ने कहा, “तिवाड़ गांव को मॉडल विलेज बनाएंगे। वहां से नई कहानी शुरू होगी।”
बैठक में तमाम इंजीनियर, अफसर और राजस्व कर्मी मौजूद रहे। पर गांववालों की आंखें अब भी सरकार पर टिकी हैं — विकास का रास्ता कब खुलेगा? और क्या उनकी जमीन की कीमत पूरी मिलेगी?
टिहरी झील के किनारे हवाएं सवाल पूछ रही हैं — ये रिंग रोड गांवों को करीब लाएगी, या दूर कर देगी?
फैसला वक्त करेगा… और वो ज्यादा दूर नहीं।
