🇮🇳 अटल को शत-शत नमन!
देहरादून | 18 दिसंबर 2025
जब राजनीति में शब्द कविता बन जाएँ…
जब सत्ता में संवेदना हो…
और जब राष्ट्र पहले हो—
तो नाम अपने आप इतिहास बन जाता है।
वही नाम है— भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी।
उनकी जन्म शताब्दी को भाजपा अब केवल स्मरण नहीं,
बल्कि “अटल स्मृति वर्ष” के रूप में
एक जनआंदोलन बनाने जा रही है।
🔴 विधानसभा से बूथ तक, अटल की गूंज
भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने ऐलान किया है कि
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष
पूरे प्रदेश में व्यापक, भावनात्मक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ मनाई जाएगी।
➡️ विधानसभा स्तर पर अटल स्मृति सम्मेलन
➡️ प्रतिमाओं पर स्वच्छता अभियान और दीप प्रज्वलन
➡️ कवि सम्मेलन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं
➡️ युवाओं के लिए रील, ग्राफिक्स और प्रश्नोत्तरी
🏛️ प्रदेश स्तरीय समिति गठित, अभियान को मिलेगी दिशा
कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए
प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल के संयोजन में
6 सदस्यीय प्रदेश स्तरीय समिति गठित की गई है।
📌 सह संयोजक:
- नलिन भट्ट
- दीपिका वोहरा
- नवीन ठाकुर
- भारत भूषण चुग
- संदीप गोयल
🗣️ महेंद्र भट्ट बोले— “अटल जी सुशासन का जीवंत उदाहरण”
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा—
“अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत 21वीं सदी की ओर अग्रसर हुआ। पोखरण-द्वितीय, कारगिल के दौरान नेतृत्व और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना उनकी अमिट विरासत हैं।”
उन्होंने याद दिलाया कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को
‘सुशासन का अटल दिवस’ कहा है—
जो भारतीय राजनीति के लिए प्रेरणा है।
🌱 राष्ट्र-प्रथम की सोच, युवाओं तक पहुंचेगी
प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि
इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि—
✔️ अटल जी की राजनीतिक यात्रा को जन-जन तक पहुँचाना
✔️ संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करना
✔️ युवाओं को राष्ट्र-प्रथम मूल्यों से जोड़ना
✔️ ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाना
“मंत्री, विधायक और सभी मोर्चे अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।”
🗓️ 24 से 31 दिसंबर तक विशेष कार्यक्रम
📅 24 दिसंबर
- अटल जी की प्रतिमाओं व स्मारकों की सफाई
- शाम को दीपोत्सव
📅 25–31 दिसंबर
- सभी विधानसभा क्षेत्रों में अटल स्मृति सम्मेलन
- 3 वक्ताओं द्वारा व्यक्तित्व और उपलब्धियों पर संवाद
📍 7 दिवसीय प्रदर्शनी
- पार्टी कार्यालय, नगर निगम, सार्वजनिक स्थल
🎨 प्रतियोगिताएं
- चित्रकला, निबंध, भाषण
- रील, ग्राफिक्स, रंगोली
- कवि सम्मेलन और क्विज़
✨ अटल स्मृति वर्ष: राजनीति नहीं, प्रेरणा का पर्व
यह आयोजन
न सत्ता का उत्सव है,
न दल का—
बल्कि विचार, संस्कार और सुशासन की विरासत का सम्मान है।
✍️ अंत में एक भाव…
अटल जी चले गए,
लेकिन उनकी कविता,
उनकी राजनीति
और उनका राष्ट्रप्रेम—
आज भी रास्ता दिखाता है।
अटल स्मृति वर्ष सिर्फ याद नहीं—
एक संकल्प है…
भारत को अटल बनाने का।
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