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“टिहरी में बेटियों के हक़ की लड़ाई तेज़! अल्ट्रासाउंड पर डीएम की सख्ती… अब नहीं चलेगा ‘लिंगभेद का खेल’”


गर्भ में बेटियों के कत्ल पर प्रहार!

टिहरी गढ़वाल से एक सख्त और अहम आदेश! डीएम नितिका खण्डेलवाल ने साफ कहा — “बिना डॉक्टर के कोई अल्ट्रासाउंड नहीं! लिंगभेद का धंधा बर्दाश्त नहीं!”

सोमवार को टिहरी जिला कार्यालय में हुई त्रैमासिक बैठक में PCPNDT एक्ट पर गहन मंथन हुआ। माहौल गंभीर था… और डीएम के तेवर तीखे।


मशीनें होंगी डिस्पोज, सख्त जांच के आदेश

बैठक में डीएम नितिका खण्डेलवाल ने आदेश दिया —

“जिन निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें कबाड़ बन चुकी हैं, उन्हें तुरंत डिस्पोज करें। और सभी अल्ट्रासाउंड के डेटा की कड़ी जांच हो!”

लिंगानुपात गिरते इलाकों पर डीएम ने सीएमओ को खास निर्देश दिए कि वहां निरीक्षण बढ़ाया जाए। सूचना विभाग को भी प्रचार-प्रसार तेज़ करने को कहा, ताकि लोगों तक सख्ती का संदेश पहुंचे।


घनसाली में अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने पर बवाल

बैठक में घनसाली क्षेत्र का मामला गरमा गया। दो लोगों ने अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने की इजाजत मांगी थी। इस पर डीएम ने सख्ती दिखाई और कहा —

“डॉक्टर मौजूद नहीं, तो अल्ट्रासाउंड सेंटर की कोई जगह नहीं है। नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी।”


7003 अल्ट्रासाउंड, लेकिन सवाल कायम…

ACMO डॉ. चंदन मिश्रा ने बैठक में बताया कि जनपद में अब तक 7003 अल्ट्रासाउंड किए गए। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी बड़ी चुनौती है। बेलेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मशीन सील करने की नौबत तक आ गई।

वहीं, सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों में ट्रैकर के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर लिंक करने की अनुमति भी दी गई, ताकि निगरानी और पुख्ता हो सके।


गुड्डा-गुड़्डी की गूंज फिर होगी ज़िंदा?

बैठक में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों ने एक अहम सुझाव दिया —

“पहले की तरह मुख्यालयों में गुड्डा-गुड़्डी चार्ट फिर लगाया जाए। ताकि लोगों को बेटा-बेटी में फर्क न करने का संदेश मिले।”


“बेटियां भी आसमान छू सकती हैं!”

डीएम खण्डेलवाल की इस बैठक ने एक बात साफ कर दी — टिहरी अब गर्भ में बेटियों की हत्या पर चुप नहीं बैठेगा।

लिंगभेद की सोच पर प्रहार ज़रूरी है। क्योंकि बेटियां भी वही आसमान छू सकती हैं, जो बेटों के लिए खुला है।


क्या हम बेटियों के सपनों की रक्षा के लिए एक कदम और आगे बढ़ाएंगे? या फिर आंकड़ों में दबती उनकी चीखें यूं ही अनसुनी रह जाएंगी?

फैसला… हमारा और आपका है।

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