“10 साल से लटकी फाइलें, टूटती उम्मीदें… एसएसबी गुरिल्ला संगठन बोला – अब आर-पार की लड़ाई”
घनसाली (टिहरी) से बड़ी ख़बर —
“मुख्यमंत्री जी, आखिर हमारी सुनवाई कब होगी?”
गुस्से और मायूसी में डूबी ये आवाज़ें आज घनसाली के गैस गोदाम और हनुमान मंदिर के पास आसमान में गूंज उठीं, जहां एसएसबी गुरिल्ला संगठन की आपात बैठक में सैकड़ों गुरिल्लाओं ने सरकार के खिलाफ नाराज़गी का ज़ोरदार इज़हार किया।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश उपाध्यक्ष और टिहरी जिला अध्यक्ष दिनेश प्रसाद गैरोला और प्रदेश मीडिया प्रभारी अनिल प्रसाद भट्ट ने मंच से साफ कहा —
“मुख्यमंत्री ने 18 सचिवों के साथ बड़ी बैठक कर हमारी मांगों पर तुरंत कार्रवाई का वादा किया था… पर आज तक फाइलें धूल खा रही हैं। दो साल से सिर्फ तारीखें और आश्वासन ही मिल रहे हैं।”

“केंद्र कहे राज्य का काम है, राज्य कहे केंद्र का… गुरिल्ले त्रस्त!”
गुरिल्ला नेताओं का आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामला टाल रही हैं।
2016 से ही हर बार एक ही जवाब थमा दिया जाता है —
“केंद्र ने 22.09.2016 को पत्र राज्य को भेज दिया था, अब फैसला राज्य सरकार करेगी।”
लेकिन गुरिल्लाओं का सवाल है — “अगर फैसला राज्य को करना है, तो 10 साल क्यों लगे?”
“दस साल से इंतज़ार, अब और नहीं!”
गुरिल्ला नेताओं की आवाज़ में आज गुस्सा भी था और दर्द भी।
अरविंद रावत (ब्लॉक सचिव, भिलंगना) ने कहा —
“हमने 2015 में एसएसबी डिपार्टमेंट का सत्यापन करा लिया था। लेकिन आज तक न कोई आदेश आया, न कोई लाभ। आखिर हम कब तक सिर्फ आश्वासन पर जिंदा रहें?”
बैठक में मौजूद परमानंद पैनुली , मकान सिंह नेगी, मोर सिंह जिर्वाण, सुनीता देवी, सुशीला देवी, लक्ष्मी देवी, मोहन सिंह चम्याल समेत सैकड़ों गुरिल्लाओं ने सरकार को साफ संदेश दिया —
“अब हम और इंतजार नहीं करेंगे। अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो बड़ा आंदोलन होगा।”
“घनसाली से उठी चेतावनी: अब आर-पार की लड़ाई”
गुरिल्लाओं का कहना है कि 20 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री ने जो वादा किया था, वह आज भी अधूरा है।
गुरिल्लाओं के लिए तीन सूत्रीय मांगों का हल मार्च 2025 तक करने की बात हुई थी, लेकिन आज जुलाई आ गया, और सरकार चुप है।
दिनेश प्रसाद गैरोला ने मंच से चेतावनी दी —
“मुख्यमंत्री जी, हमारी सहनशीलता की परीक्षा मत लीजिए। अब समय आ गया है कि गुरिल्लाओं को उनका हक मिले। वरना हमें सड़कों पर उतरने से कोई नहीं रोक सकता।”
घनसाली की फिजाओं में आज सिर्फ एक ही गूंज थी —
“जय उत्तराखंड! जय एसएसबी युद्ध प्रशिक्षित गुरिल्ला उत्तराखंड!”
क्या धामी सरकार इस चेतावनी को सुनेगी, या गुरिल्लाओं का गुस्सा एक और बड़े आंदोलन में बदल जाएगा?
👉 सोचिए, क्या कोई हक़दार वर्ग यूं दशकों तक सिर्फ आश्वासन पर टाला जा सकता है?
