हाईकोर्ट ने लगाया झटका, लेकिन सरकार अब भी बेहोश: “कौन चला रहा उत्तराखंड की सरकार? मंत्री गायब, पंचायतें लावारिस!”

Share Now

https://www.facebook.com/share/v/19MXkYojH6

सूर्यकांत धस्माना का तीखा वार — नौकरशाही के आगे पंगु है सरकार, पंचायतीराज मंत्री का अता-पता नहीं!


📝 मुख्य कहानी (Script):

देहरादून से चौंकाने वाली तस्वीर —
उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त एक बड़ा सवाल गूंज रहा है — “प्रदेश का पंचायतीराज मंत्री है कौन?”
यह सवाल उठाया है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने, और साथ ही धामी सरकार को जमकर घेरा है।


🔍 नौकरशाही ने चुनी हुई सरकार को बनाया ‘तमाशा’:
धस्माना ने प्रेस कांफ्रेंस में तीखे आरोप लगाते हुए कहा —

“प्रदेश की नौकरशाही ही असली सरकार चला रही है, जबकि मंत्रीगण कठपुतली बनकर बैठे हैं।”

उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायतीराज अधिनियम की नियमावली का कहीं कोई अता-पता नहीं, और सरकार अदालत में जाकर हास्यास्पद जवाब दे रही है कि “नियमावली तो नोटिफाई हो गई, लेकिन प्रेस वालों ने छापी नहीं!”


🗳️ पंचायत चुनाव का पूरा सिस्टम ढह गया:
धस्माना ने कहा कि पहले सरकार पंचायत चुनाव समय पर नहीं करवा पाई।
फिर जिन जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो गया, उन्हें ही प्रशासक बना दिया गया।

जब अदालत ने फटकार लगाई, तो आनन-फानन में चुनाव की तारीखें घोषित कर दी गईं।
लेकिन आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित कर दिया गया — जिससे पूरे राज्य में असंतोष भड़क गया।


⚖️ हाईकोर्ट ने लगाया झटका, लेकिन सरकार अब भी बेहोश:
हाईकोर्ट ने जब सरकार से नियमावली मांगी और संतोषजनक जवाब नहीं मिला —
तो पंचायत चुनावों पर “स्टे” लगा दिया।

“कल से नामांकन शुरू होना था, लेकिन किसी को नहीं पता चुनाव हो रहे हैं या नहीं।
आचार संहिता लागू है, पर चुनाव अधर में हैं।
ये सरकार है या सर्कस?”

– सूर्यकांत धस्माना


❗ जनता पूछ रही है — पंचायतीराज मंत्री कहां हैं?
पूरा प्रदेश जानना चाहता है —
क्या राज्य में कोई मंत्री है जो पंचायत चुनावों की स्थिति पर जवाब दे सके?
या फिर मंत्रिमंडल को नौकरशाही ने पूरी तरह हाशिए पर डाल दिया है?


🔚 अंतिम पंक्ति (Closing Reflection):

जब चुनी हुई सरकारें चुप हो जाएं, और प्रशासन फैसले ले —
तो लोकतंत्र नहीं, नौकरशाही राज होता है।
अब जनता को तय करना है — चुप रहें या जवाब मांगें।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!