“केदारनाथ का रास्ता बंद… फिर खुला… फिर बंद!” — बारिश और मलबे ने रोकी भक्तों की राह

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सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर फिर संकट, आस्था की डगर बनी खतरनाक

रुद्रप्रयाग से बड़ी खबर — केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं की सांसें थम गईं, जब रातभर की बारिश के बाद सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच रास्ता दो जगहों पर पूरी तरह से बंद हो गया। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु रास्ता खुलने के इंतजार में ठहरे रहे। करीब सुबह 9 बजे मलबा हटाकर रास्ता खोला तो लोगों में थोड़ी राहत की सांस आई।

लेकिन खतरा टला नहीं है।

रास्ता बना मलबे का खेल… हर पल खतरा

सोनप्रयाग शटल पुल के पास और मुनकटिया इलाके में भूस्खलन के चलते लगातार मलबा और पत्थर गिर रहे हैं। सड़क पर कभी आवाजाही शुरू होती है, तो कुछ ही देर में फिर मलबा आकर सब रोक देता है।

“मंदिर तो जाना ही है, लेकिन डर लगता है… कहीं पहाड़ न टूट पड़े!”
– एक श्रद्धालु, गौरीकुंड में फंसे हुए

पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर

पुलिस ने दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर दी है। यात्रियों को सुरक्षित जगह पर रोका गया है। जैसे ही रास्ता साफ होता है, लोगों को धीरे-धीरे आगे भेजा जा रहा है। प्रशासन और कार्यदायी संस्थाएं दोनों छोरों से लगातार रास्ता साफ करने में जुटे हैं।

“बरसात के बाद हालात बदल जाते हैं। अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है।”
– प्रशासनिक अधिकारी

आस्था बनाम खतरा — सवाल वही है

केदारनाथ जाने का रास्ता फिलहाल आंख-मिचौली खेल रहा है — कभी खुलता है, कभी बंद होता है। हालात इतने नाजुक हैं कि एक पल में सब बदल सकता है।

जनपद पुलिस ने साफ अपील की है:

“कृपया मौसम पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा पर निकलें। आपकी सुरक्षा सबसे पहले है।”

कुदरत की इस चुनौती के बीच सवाल है — आस्था की डगर पर हर साल यही खतरा क्यों दोहराया जाता है? क्या हम आने वाली पीढ़ियों को इससे सुरक्षित राह दे पाएंगे?

आप भी सोचिए… केदारनाथ बुला रहा है, लेकिन इस बार रास्ता भी जवाब मांग रहा है!


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