देहरादून। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आखिरकार 2015 में टिहरी के एक दूरदराज के गाँव में मिली तलवारों और हथियारों की वैज्ञानिक जाँच पूरी कर ली है। टिहरी गढ़वाल के पेपोला ढुंग में सड़क निर्माण के काम के दौरान जमीन से निकली एक तलवार ने एएसआई को भी हैरान कर दिया है।
इस तलवार के बारे में टिप्पणी करते हुए, वैज्ञानिक जाँच पर आधारित एएसआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है, इसके अलावा, तांबे और जस्ता (जिंक) से भरपूर एक हिस्से (संभवतः एक क्विलॉन ब्लॉक या क्रॉस गार्ड) की खोज से पता चलता है कि हथियार बनाने के कुछ हिस्सों में जानबूझकर पीतल का इस्तेमाल किया गया था, जो अन्य चीजों की मुख्य रूप से लोहे की बनावट से अलग है। यह ऐतिहासिक हथियारों में धातु के चुनाव के प्रति एक बारीक और सोची-समझी सोच को दिखाता है।
टिहरी गढ़वाल के पेपोला ढुंग में मिले 94 हथियार 2015 से ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून कार्यालय के स्टोर में रखे हुए थे। देहरादून के आरटीआई कार्यकर्ता राजू गुसाईं ने 17 फरवरी 2025 को एएसआई में एक आरटीआई अर्जी दाखिल कर बरामद हथियारों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। इसका जवाब चौंकाने वाला था, जिसमें बताया गया कि अभी तक इन हथियारों की वैज्ञानिक जाँच नहीं की गई है। उनकी आरटीआई के दबाव में एएसआई को इन हथियारों को जाँच के लिए भेजना पड़ा। लेकिन, इसके बाद भी वैज्ञानिक जाँच शुरू नहीं हो रही थी, इसलिए गुसाईं ने नियमित रूप से आरटीआई अर्जियाँ दाखिल कर इस बारे में जानकारी मांगी। हाल ही में, एएसआई ने आवेदक को चार पन्नों की एक रिपोर्ट भेजी है।
मिले 94 हथियारों में से एएसआई ने कुल 80 हथियारों की वैज्ञानिक जाँच की। एएसआई की ट्टवैज्ञानिक और संरक्षण शाखा’ ने यह अध्ययन किया। यह जाँच 8 और 9 मई 2025 को की गई थी, और इसकी शुरुआती रिपोर्ट 26 मई 2025 को तैयार की गई। साल 2015 में, टिहरी गढ़वाल के एक दूरदराज के गाँव में जमीन से तलवारें, भाले और अन्य हथियार मिले थे। इन हथियारों के मिलने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन इनकी कोई वैज्ञानिक जाँच नहीं कर रहा था। आरटीआई के दबाव में ही एएसआई को यह जाँच करवानी पड़ी, और यहाँ तक कि वैज्ञानिक जाँच की रिपोर्ट भी आरटीआई के जरिए ही हासिल की गई।