कहते हैं कि पहाड़ का पानी और जवानी यहां रुकती नहीं है, लगातार मैदानी क्षेत्रों की तरफ दौड़ती चली जाती है, विज्ञान और इंजीनियरिंग के मेल से पहाड़ों में पानी को बांध बनाकर रोक लिया गया है, किंतु पहाड़ों से बेरोजगार जवानी अभी भी लगातार मैदानों की तरफ भागती जा रही है, जबकि उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए एक से बढ़कर एक उम्मीदें बरकरार हैं ।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं भौगोलिक परिस्थितियां साहसिक पर्यटन के लिए माकूल हैं। यही वजह है कि यहां रोमांच से भरपूर साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। यहां पहाड़ों से छलांग लगाकर हवा में तैरने का आनंद भी लिया जा सकता है तो बर्फीली पहाड़ियों में स्कीइंग का मजा भी लिया जाता है। यही वजह है कि प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक उत्तराखंड में रोमांच का एहसास करने आते हैं।
यहां एडवेंचर स्पोर्ट्स एक्टिविटी से युवाओं को आजीविका से जोड़ा जा सकता है। साहसिक पर्यटन विभाग लंबे समय से उत्तरकाशी जनपद मे कार्यरत है । गढ़वाल की गंगा और टोंस जबकि कुमाऊं की काली गंगा में राफ्टिंग से जुड़े हुए हजारो कंपनियां काम कर रही हैं जहा स्थानीय युवा रोजगार पा रहे है , जबकि इसकी तुलना में भागीरथी नदी में रोजगार के अवसर उस तुलना में विकसित नहीं हो पाए। वजह कुछ भी हो, सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन हकीकत यही है कि संसाधन होते हुए भी युवा अपना हक पाने के लिए यहा वहा दौड़ लगाते रहे ।
ऐसा नहीं है कि इसके लिए प्रयास नहीं हुए, अब उत्तरकाशी की जोशीयाडा झील को ही ले लीजिये इस पर साहसिक खेलो की सुरुवात पहले भी हुई , किंतु एक बार शुरुआत के बाद उसे उसी के हाल पर छोड़ दिए जाने का अंजाम यहा के युवाओ को भुगतना पड़ा है ।
इस बार उत्तरकाशी साहसिक पर्यटन की तरफ से स्थानीय 20 युवाओं को 5 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने तिलोथ पुल के पास हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि सरकार युवाओं के लिए चिंतित है और चाहती है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले।
उत्तरकाशी के ही रहने वाले युवा इस विधा में पारंगत होकर नेशनल खेल चुके हैं इसके अलावा रस्सो से नदी नालो को करते हुए देवी आपदा के समय यहां से ट्रैंड युवा अपनी सेवाओं दे सकते हैं।
