पीसीएस परीक्षा की तिथि बढ़ाने को यूकेडी ने सीएम को लिखा पत्र

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देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार से पीसीएस मुख्य परीक्षा की टिप्सी को आगे बढ़ाने और गंभीर अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। यूकेडी नेता शिव प्रसाद सेमवाल ने सीएम से मांग की है कि आयोग में विभिन्न परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की जाए ताकि भविष्य में ऐसे किसी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना हो सके।
शिवप्रसाद सेमवाल ने सीएम से पत्र में कहा है कि हम ध्यान राज्य में उतराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जा रही पीसीएस मुख्य परीक्षा में राज्य के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। राज्य में 10 अगस्त 2021 को उत्तराखण्ड सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा के 318 पदों के संदर्भ में नोटिफिकेशन जारी किया गया था जिसकी प्रारम्भिक परीक्षा 3 अप्रैल 2022 को हुई थी।
इस प्रारंभिक परीक्षा में आयोग ने 6 प्रश्न गलत बनाये थे जिन्हें बाद में आयोग ने पेपर से हटा दिया था। हालांकि उत्तराखंड राज्य नाम परिवर्तन से सम्बंधित प्रश्न, जिसका उत्तर 2006 है, आयोग ने इसका उत्तर गलत दिया जिस कारण लगभग 300 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा से वंचित हुए हैं। ये सभी अभ्यर्थी उच्च न्यायालय की शरण में गए जहॉं न्यायालय ने भी 4 जुलाई को आपने आदेश में 2006 वाले विकल्प को सही मानते हुए आयोग को अपनी उत्तरकुंजी पर पुनर्विचार करने को कहा। किंतु 4 जुलाई को उच्च न्यायालय द्वारा साफ आदेश देने के बावजूद अभी तक आयोग ने इस प्रश्न मैं अपनी त्रुटि में सुधार नहीं किया जिस कारण सैकड़ों युवा मुख्य परीक्षा से वंचित होकर बैठे हैं। इसके अतिरिक्त उद्यान अधिकारी, वित्त अधिकारी और सांख्यिकी अधिकारी के पदों पर घोषित कट ऑफ में भारी मात्रा में गड़बड़ी हुई है। उद्यान अधिकारी के लिए कट ऑफ से ज्यादा मार्क्स होने के बावजूद सैकड़ों अभ्यर्थियों को प्रारम्भिक परीक्षा के परिणाम से बाहर रखा गया जिस कारण उन्हें भी उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।
उच्च न्यायालय ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दिया एवं ठैब एग्रीकल्चर वाले विद्यार्थियों को भी मुख्य परीक्षा में शामिल करने के निर्देश लोक सेवा आयोग को दिए। उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए आदेश के अनुपालन में आयोग ने 29 जुलाई एवं 1 अगस्त को कृषि स्नातकों को इन पदों के लिए योग्य मानते हुए मुख्य परीक्षा में शामिल तो किया किंतु तब जबकि मुख्य परीक्षा में मात्र 20 दिन शेष हैं। इसके अतिरिक्त अन्य राज्य की महिलाओं को राज्य सेवाओं में आरक्षण से सम्बंधित विषय भी 6 अगस्त को उच्च न्यायालय में लंबित है। वर्ष 2016 के बाद पूरे 6 वर्ष के पश्चात राज्य में च्ब्ै परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है किंतु सभी परीक्षाओं की तिथि जैसे स्वूमत पीसीएस, न्यायिक सेवा, पीसीएस एवं समीक्षा अधिकारी की मुख्य परीक्षाएँ एक साथ एक छोटे से समयान्तराल में रखी गयी है, कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिहोने एक साथ 2-3 परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। उनके सामने अब समस्या यह है कि वे एक साथ इन सब परीक्षाओं की तैयारी इतने कम समय में कैसे करेंगे। सेमवाल ने कहा कि 20 अगस्त को प्रस्तावित पीसीएस मुख्य परीक्षा को कम से कम 3 महीने आगे बढ़ाया जाय, चूंकि परीक्षा 6 साल के अंतराल में हुई है ऐसे में इस प्रकार जल्दबाजी से राज्य के स्थानीय युवा काफी असमंजस की स्थिति में हैं। इसी के साथ एग्रीकल्चर के लगभग 200 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी हेतु मात्र 19 दिन का समय दिया गया है जो किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। उत्तराखंड राज्य नाम परिवर्तन वाले प्रश्न में कोर्ट के आदेशानुसार आयोग को उन सभी विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल किया जाए जिन्होंने 2006 को सही विकल्प चुना है एवं जिनका सलेक्शन 1 या 1.5 नम्बर से रुका हुआ है। आयोग में विभिन्न परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की जाए ताकि भविष्य में ऐसे किसी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना हो सके।

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