कोरोना संक्रमण की पहली लहर में मिली राहत का आम जनता के साथ सरकारी कार्यालयों और बाजार खुल कर दुरपयोग का खामियाजा अब एक बार सबको भुगतना पड़ सकता है| नयी गाइड लाइन के अनुसार फिर से सरकारी कार्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बारी बारी 50 % ही बुलाया जा सकेगा जबकि गर्भवती महिलाओ बुजुर्गो और गंभीर बीमारी से ग्रस्त कर्मचारियों को विशेष परिस्थिति में ही ऑफिस में बुलाया जा सकेगा | आपातकाल में किसी भी कर्मचारी को कभी भी बुलाया जा सकेगा | डीएम उत्तरकाशी ने आपदा प्रबंधन एक्ट में मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश जारी किये है
अध्यक्ष जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण/जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित ने कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत जनपद के शासकीय कार्यालयों में तैनात समूह ग एवं घ के कार्मिकों (आवश्यक सेवाओं वाले विभागों को छोड़कर) की उपस्थिति को 50% तक रोटेशन के आधार पर सीमित रखने के आदेश जारी किए है।
इसके अलावा ऐसी महिला कार्मिक जो गर्भावस्था में हो अथवा जिनकी संतान 10 वर्ष से कम उम्र की हो केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही कार्यालय बुलाई जा सकेगी, इसी प्रकार 55 वर्ष से अधिक आयु अथवा गंभीर बीमारी से ग्रसित कार्मिकों को भी अपरिहार्य स्थिति के अलावा कार्यों में नहीं बुलाया जाएगा। राज्य के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत ब्लाइंड एवं दिव्यांग कार्मिकों (essential service) में कार्यरत एवं अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर को कार्यालय में उपस्थिति से छूट रहेगी।
शासकीयहित मे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी कार्मिक को कार्यालय में बुलाया जा सकेगा। जहां तक सम्भव हो बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही की जाएगी। यदि सम्भव नही हो तो बैठक की अवधि यथासम्भव कम से कम रखी जाय।कोविड-19 के संक्रमण के नियंत्रण हेतु शासकीय कार्यालयों में सावधानी बरतने के सम्बंध में निर्गत दिशा-निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाय। उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करना सुनिश्चित किया जाएगा। उक्त के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005( Epidemic Diseases Act-1897) एवं भारतीय दंड संहिता तथा अन्य अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
