उत्तरकाशी
प्रदेश की राजधानी देहरादून में 26 अप्रैल साम 7 बजे से 3 मई सुबह तक एक सप्ताह तक covid कर्फ्यू लगाने के फैसले का सूबे के अन्य जिलो में कोई असर देखने में नहीं मिल रहा है |

उत्तरकाशी जिले में अभी दोपहर दो बजे तक बाजार खुले है इसके बाद भी बाजार में ठसा ठस भीड़ भरी हुई है, फर्क इतना जरुर नजर आया है कि लोगो ने अपने मास्क जो पहले सिर्फ गले में लटके रहते थे उसे नाक के ऊपर तक सरका लिया है , बाकी बैंक, एटीएम, टेलर की दुकान, राशन, शादी व्याह का सामान आदि की दुकानों में न तो सोसल डिस्टेंस दिखाई दे रही है और न डिस्टेंस के गोले | covid संक्रमण के आंकड़े देखकर जो भयावह तस्वीर नजर आती है बाजार की भीड़ भाड देखकर ऐसा कुछ नजर नहीं आता है | सब सामान्य दिनों की बात लगती है | RTPCR कि रिपोर्ट आने के बाद भी लोगो में बुखार, बदन दर्द, ठण्ड लगने आदि की शिकायत मिल रही है | हैरानी की बात ये है कि लोग शादी व्याह की पार्टी में जाने का उत्साह भी नहीं छोड़ पा रहे है इसके लिए कई जनपदों को पार कर वैवाहिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे है | फिलहाल विवाह कार्यक्रम में 50 लोगो के सामिल होने कि SOP जारी हुई है किन्तु ये सब सिर्फ नगरीय इलाको के लिए है, ग्रामीण इलाको के लिए नहीं, ऐसे में शादी के सीजन में खरीददारी से लेकर आवाजाही तक पर भीड़ बढ़ना लाजमी है | उत्तरकाशी के व्यापारी बीएस रावत ने बताया कि सामान्य दिनों में लोग फुर्सत से बाजार आते थे, तो भीड़ इतनी ज्यादा नहीं लग रही थी अब दो बजे से पहले सभी को राशन पानी शब्जी और शादी कि खरीददारी करनी है | ग्रामीण इलाको से आने वालो को तो आने जाने के लिए गाडी की टाइमिंग के हिसाब से भी शौपिंग करनी है | शब्जी मंडी से तस्दीक खान ने बताया कि 11 बजे तक शब्जी के ट्रक पहुच रहे है और दो बजे बाजार बंद हो जाता है , राजधानी में जहा एक सप्ताह का covid कर्फ्यू है वहा तो शब्जी बाजार 4 बजे तक खुल रहा है और उत्तरकाशी में सिर्फ दो बजे तक |

कुल मिलाकर स्थिति ये है कि लौक डाउन लगाकर कोई भी अपने गले में घंटी नहीं बांधना चाहता है इसलिए केंद्र ने राज्य सरकार को और राज्य सरकार ने सम्बंधित जिले के डीएम को उसके विवेक पर कर्फ्यू पर फैसला लेने के लिए छोड़ दिया है | बाजार में जगह जगह खाड़ी RTPCR कोरोना जाँच टीम भी वायरस के म्युटेसन के बाद बेअसर नजर आ रही है | ऐसे में प्रशाससं को चाहिए कि भले ही बाजार की टाइमिंग बढानी पड़े पर सोसल डिस्टेंस का पालन जरुरी होना चहिये | भीड़ को किसी भी सूरत में एक स्थान पर एकत्र नहीं होने देना चाहिए , साथ ही बिना वजह से घुमने के लिए बाजार का रुख करने वालो पर भी सख्ती करने की जरुरत है | लौकडाउन लगाने से आर्थिक मंदी आएगी तय है, और नहीं लगाते है तो इंसानी जीवन लीला समाप्त होने का खतरा बढ़ रहा है, ऐसे में बीच का मार्ग यही बचता है कि बाजार का टाइमिंग भले ही बढ़ जाय पर भीड़ एक जगह पर नहीं लगनी चाहिए, इसके लिए क्या प्रयास किये जा सकते है ये सम्बंधित जिले के डीएम को अपने विवेक से तय करना है |
