श्रमायुक्त उत्तराखंड ने आदेश जारी किए। श्रम प्रवर्तन अधिकारी देहरादून बृजमोहन को उत्तरकाशी का भी दायित्व मिला।
निर्माण कार्य के दौरान हादसे मे घायल होने अथवा मौत होने पर मिलता है मुआवजा
श्रमिक कल्याण से जुड़ी दर्जनों सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ इसलिए नही मिल रहा था ,क्योंकि मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीकरण ही नही हो पा रहा था| अधूरी जानकारी लिए लोग श्रम विभाग को सिर्फ चालान करने तक ही जानते है, जबकि विभाग श्रमिको के कल्याण के लिए है, श्रमिक में सिर्फ निर्माण कार्य मे लगा हुआ राज मिस्त्री लेबर और शटरिंग वाले लोहार ही नही आते बल्कि वे सभी मजदूर है जो सड़क पर ठेला लगते हो या दुकानों पर कारपेंटरी अथवा वेल्डिंग या कोई भी अन्य कार्य कर रहे हो और किसी संगठन से नही जुड़े है।
पंजीकरण के अभाव मे नहीं होतो मजदूरों की मदद
इन मजदूरों को कार्य की स्किल के साथ औजार खरीदने के लिए बच्चों की पढ़ाई के लिए उनकी शादी के लिए और घर बनाने के लिए भी आर्थिक मदद मिलती है। इतना ही नही निर्माण कार्य के दौरान हादसे में घायल होने अथवा मौत होने पर पंजीकृत मजदूरों को सरकारी मदद मिलती है अक्सर ठेकेदार अथवा नियोक्ता मजदूरों का पंजीकरण नही करवाते है जिससे उन्हें इसका लाभ नही मिल रहा था, प्रदेश में विभागीय कर्मचारी और अधिकारियों की भारी कमी के चलते भी दिक्कतें आ रही थी। लंबे समय से उत्तरकाशी का चार्ज देहरादून, रुद्रप्रयाग अथवा टिहरी जिले के प्रभारियों द्वारा देखा जा रहा था जो भौगोलिक रूप से प्रभावी नही हो पा रहा था।
तेजी से होगा मजदूरों का पंजीकरण तो जरुरतमन्द के साथ होगा न्याय
जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित ने कहा कि जिले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी के नही होने के कारण श्रमिक हित के कार्य प्रभावित हो रहे थे। शासन से श्रम प्रवर्तन अधिकारी की मांग की गई थी। जिसके तहत श्रम विभाग द्वारा श्रम प्रवर्तन अधिकारी की तैनाती के आदेश जारी किए है। उक्त अधिकारी की तैनाती होने से असंगठित मजदूरों का ई-श्रमिक पोर्टल पर पंजीकरण के साथ ही कई कार्यों में तेजी आ सकेगी।
