उत्तरकाशी – ये है मन के अमीर, ऊंची हवेली और लंबी कार वालो से भी बड़े धनी – सोच को सैल्यूट

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लोक डाउन को लेकर देशभर में फैली बेरोजगारी को लेकर  आमजन के साथ राज्य और केंद्र सरकार भी चिंतित बैठी है,  वही कुछ लोग धरातल पर ऐसे भी काम कर रहे हैं कि बड़े बड़े नामी गिरामी संस्थान भी उनको फॉलो करने को मजबूरी हो जाते है ।

गिरीश गैरोला

 उत्तरकाशी जिले के सुदूरवर्ती थांडी गांव के सामाजिक एकता परिवार संगठन के लोग लॉक डाउन के इन दिनों में अपने निजी खेतों पर टमाटर गोभी पत्ता, हरी मिर्च, भिंडी ,लौकी, कद्दू आदि की क्यारी   तैयार कर रहे हैं और उसके बाद इसे अपने गांव के अन्य लोगों को भी बांट रहे हैं ताकि उनकी आमदनी में इजाफा हो और गांव अपने पैरों पर खड़ा हो सके।चंडीगढ़ में लॉक डाउन के चलते फंसे सोवन सिंह ने बताया सामाजिक एकता परिवार के अध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत जो होटल लाइन में चंडीगढ़ में  काम करते थे लॉक डाउन से पहले छुट्टी लेकर घर आए थे और घर में ही फंस गए । लॉक डाउन के खाली समय का समाजिक कार्यों में उपयोग करते हुए उन्होंने अपने संगठन के कोषाध्यक्ष यशवीर सिंह के साथ मिलकर एक नई पहल शुरू की। इन लोगों ने अपने निजी खेतों पर पत्ता गोभी, टमाटर, हरी मिर्च भिंडी ,लौकी ,कद्दू, 45 दिन में तैयार होने वाली बीन की क्यारी तैयार की 45 दिन बाद इन पौधों को गांव के अन्य लोगों में बांट दिया। यशवीर सिंह कहते हैं 45 दिन बाद  पौध से फसल मिलनी शुरू हो जाएगी और गांव धीरे धीरे अपने पैरों पर खड़ा होगा , कम से कम अपनी जरूरत की सामान को लेने के लिए बाजार पर निर्भरता कुछ तो कम होगी। उन्होंने कहा कि इसी प्रयोग के अंतर्गत आने वाले बरसात  के  समय  गुलाब की कलम भी इसी तरह से वितरित की जाएगी, ताकी  गांव में गुलाब का भी उत्पादन बढ़ सकें। बताते चलें कि इससे पहले भी गांव में सैनिटाइजर, साबुन ,मास्क इत्यादि बांटकर सामाजिक एकता परिवार ने एक मिसाल कायम की है । साथ ही यह भी सिद्ध किया है कि सामाजिक सेवा करने के लिए बड़ा नाम और बैनर की जरूरत नहीं अपने घर गांव और परिवार से ही इसकी शुरुआत की जा सकती है।

पहाड़ो में पैसा कमाकर सैकड़ो हजारों परिवार मैदानों में बस गए है, जबकि गांव में ही सीएससी सेंटर चलाने वाले यशवीर सिंह खुद की छोटी  सी जीविका उपार्जन के साथ गांव के अन्य लोगों के लिए भी चिंतित रहते हैं, ये बताने के लिए पर्याप्त है की असल मायने में धनी कौन है ? पैसा कमा कर ऊंची हवेली खड़े करने वाले ? महंगी लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले?  या अपने साथ गांव के अन्य लोगों को हाथ पकड़ कर साथ चलने की कोशिश करने वाले?  सच ही कहा है की  तन से धनी तो बहुत देखे पर मन के धनी विरले ही दिखाई देते हैं , और ऐसे ही मन के धनी लोगो के इस प्रयास को जय हिंद के साथ एक सेल्यूट

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