उत्तरकाशी – पर्यटन प्रदेश की हवा निकाल रहा खुद पर्यटन विभाग? सीएम के आदेश भी ठेंगे पर ? जीएमवीएन के निदेशक का खुलासा

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उत्तरकाशी

राज्य  से लेकर  केंद्र तक डबल इंजिन का तमगा लेकर घूम रही बीजेपी सरकार के कार्यकाल मे चिराग तले अंधेरे को दूर करने के लिए बीजेपी के नेता और जीएमवीएन के निदेशक लोकेन्द्र बिष्ट ने पत्रकार वार्ता की |

लोकेन्द्र बिष्ट ने प्रदेश मे पर्यटन से राजस्व कमा कर प्रदेश चलाने के दावे के बीच  एक बड़ा खुलासा किया है | प्रदेश मे पर्यटन कि कमान संभाले जीएमवीएन से अपनी  ही संपत्तियो का ब्योरा नहीं संभाला जा रहा है | हालात ये है कि निगम  और पर्यटन विभाग के बीच तारतम्य के अभाव और जनप्रतिनिधियों कि सुस्ती के चलते विभाग अपनी ही  संपत्तियो से एक एक कर हाथ धो रहा है | जीएमवीएन के निदेशक ने बताया कि उत्तरकाशी जिले मे

1- चिन्यालीसौड के पीपल मंडी मे निगम का गेस्ट हाउस हिलान्स टिहरी झील मे समा गया तो विभाग ने झील प्रशासन से मुआवजा लेकर फिर से गेस्ट हाउस का निर्माण नहीं कराया  |

2- उत्तरकाशी केदारनाथ बाय पास मार्ग पर चौरंगी खाल के पास वर्ष 2008 मे सीएम घोषण के बाद भी निगम ने गेस्ट हाउस का निर्माण नहीं कराया जबकि फॉरेस्ट लैंड का मसला भी हल हो गया था जिसके बाद उस समय डीपीआर पर भी करीब  85 हजार रु खर्च किए गए थे | वर्ष 2008 से लेकर 2020 तक 12 साल तक प्रतिनिधि सजग नहीं रहे तो निगम को अपनी संपत्ति से वंचित रहना पड़ा और प्रदेश मे पर्यटन को घाटा उठाना पड़ा हालांकि ये काम पर्यटन विभाग का था | गेस्ट हाउस निर्माण के बाद विभाग इसे जीएमवीएन अथवा केएमवीएन को सौंप देता है | लेकिन जन प्रतिनिधोयों कि चुप्पी भी कबीले गौर थी

3- उत्तरकाशी के भटवाडी मे जीएमवीएन का गेस्ट हाउस वर्ष 2010 कि आपदा मे वासआउट हो गया था | इस दौरान सभी निजी और सरकारी संपत्तियो का मुआवजा तैयार किया गया पर जीएमवीएन के गेस्ट हाउस का मुआवजा न तो निगम ने लिया और न पर्यटन विभाग ने | ऐसे मे अधिकारियों कि अकर्मण्यता के बाद जनप्रतिनिधि भी चुपचाप सोते रहे ?

4- उत्तरकाशी – गंगोत्री हाइ वे से लगे मनेरी मे झील के उस पार पर्यटन विभाग ने गेस्ट हाउस का निर्माण तो किया परे लंबे समय  से विभाग की  सुस्ती से उसमे अभी भी मजदूर निवास कर रहे है |

5- गंगोत्री धाम से कुछ पहले भैरव घाटी मे जीएमवीएन के गेस्ट हाउस का वर्षो से निर्माण अधूरा पड़ा रहा और पर्यटको को सुविधा न मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा |

बतोर निदेशक जीएमवीएन एक सजग प्रतिनधि होने के नाते अपनी ज़िम्मेदारी के लिए लोकेन्द्र बिष्ट को बधाई  दी जा सकती है पर पिछले  12 साल और दो बार बीजेपी के कार्यकाल मे प्रतिनिधियो द्वारा जीएमवीएन की संपत्तियो की  तरफ अंखे मूँदे रखना और अब एन वक्त बीजेपी नेता द्वारा इसे उठाना भी राजनैतिक पंडितो के बीच चर्च का विषय बना हुआ है |

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