आखिर रामचंद्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी मे बीएड संकाय बिना यूनिवर्सिटी से आफिलियेसन के कैसे चल रहा है । वर्ष 2020 के बाद से श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी ने संबद्धता का कोई प्रमाण पत्र नहीं भेजा इसके बाद भी लगातार नए प्रवेश जारी है आखिर कैसे ?
कोई नियम कानून है भी या नहीं ?
बी एड के छात्रों की छात्र वृति नहीं मिली तो छात्रों ने इसके लिए समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटे तो चौंकाने वाली जानकारी मिली ।
समाज कल्याण विभाग ने बताया कि उनके पास महाविधलाय की संबद्धता से संबंधित कोई प्रमाण पत्र पिछले कुछ वर्षों से नहीं मिल रहा है ,
मामला उछला तो डीएम के दाखल के बाद महाविधलाय ने यूनिवर्सिटी को लिखा जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने चार लाइन का जो प्रमाण पत्र भेजा उसे समाज कल्याण विभाग के निदेशालय ने रिजेक्ट कर दिया है । अब हैरान परेसान छात्रों ने महाविधलाय के सामने बिस्तर डाल कर भूख हड़ताल सुरू कर दी है
छात्रों ने संस्थान की मान्यता और छात्रवृत्ति को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला फूंका इस मांग को लेकर महाविद्यालय के बीएड छात्र छात्राओं ने कॉलेज परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है रविवार को महाविद्यालय गेट परिसर में एकत्रित छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन का पुतला फूंकते हुए लंबे समय से अटकी छात्रवृत्ति देने की मांग उठाई
इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष के नेतृत्व में छात्रों ने जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया तथा अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए छात्रों ने कहा कि वर्ष 2020 से महाविद्यालय को मान्यता का प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है जिस कारण छात्रों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और समाज कल्याण विभाग मे कोई सुनवाई नहीं हो रही है
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में धांधली को लेकर तो छात्र पहले ही परेशान हैं अब तकनीकी शिक्षा लेकर नौकरी का ख्वाब देख रहे छात्रों के लिए भी एक नई परेशानी खड़ी हो गई है , मामला उत्तरकाशी का है जहां राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी में ने छात्रों को b.ed के लिए एडमिशन तो दे दिया लेकिन महाविद्यालय ने संस्थान के मान्यता की फाइल कोरोना के बाद से आगे नहीं बढ़ाई जिसके बाद ओबीसी और अन्य छात्रवृत्ति यों को लेकर भी छात्रों को परेशानी हो रही है
मिली जानकारी के अनुसार कोरोना काल के बाद वर्ष 2020 से उत्तरकाशी महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी से एफीलिएशन नहीं मिली है ऐसे मे बड़ा सवाल यह उठता है कि ये मामला सिर्फ छात्रों की छात्रवृत्ति से ही जुड़ा नहीं है जब 2020 से कॉलेज को श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी से एफीलिएसन ही नहीं मिली तो फिर न्यू एडमिशन किस आधार पर हो रहे हैं और जो बच्चे पास आउट होकर निकल रहे हैं उन्हें किस आधार पर सरकारी नौकरी के लिए लीगल माना जाएगा ?
आखिर इसका जबाब कौन देगा ? समाज कल्याण विभाग – महाविद्यालय अथवा यूनिवर्सिटी ?
मिली जानकारी के अनुसार श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए जितने भी महाविद्यालय हैं उन सब में यही समस्या चल रही है किन्तु 2020 से अभी तक समाधान की दिशा मे एक भी कदम आगे नहीं बढ़ाया गया
धन्य है उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा से जुड़े उत्तराखंड के विभाग
