12 घंटे कि दिनचर्या मे घर गृहस्थी के काम के साथ दुनियादारी भी निभानी होती है| समय को पहिचान करते हुए जिसने अपनी बात कह दी वही मुकद्दर का सिकंदर कहलाता है | पर जब एक ही मंच पर दो हस्तिया एक साथ अपनी बात कहने लगे तो लोग किसे सुने? | यही वाकया उत्तरकाशी मे काँग्रेस की एक रैली मे हो गया जब समय की कमी के चलते पूर्व विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष दोनों एक साथ अपने मन कि बात जनता को सुनने को आतुर हो गए |
आमतौर पर राजनीति की पूरी लड़ाई कुर्सी के लिए ही होती है पर कभी कभी कुर्सी पाने के लिए कुर्सी का मोह छोडना भी पड़ता है | उत्तरकाशी जिला मुख्यालय मे काँग्रेस की एक रैली मे एक ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब हनुमान चौक की जनसभा मे सभी छोटे बड़े कार्यकर्ता मंच पर आसीन थे जबकि गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवान धरती पर बैठे थे |
मंच पर सभी काँग्रेस के कार्यकर्ता स्थान पाने से फुले नहीं समा रहे थे, मौका विधान सभा चुनाव 2022 की तैयारी का था , इसलिए सभी को थोड़ा थोड़ा गला साफ करने के लिए मंच भी सौंपा गया ताकि भविष्य के नेताओ की खेप भी तैयार हो सके और चुनाव प्रचार मे मदद भी , पर कुछ उत्साहित कार्यकर्ता ज्यादा ही बोल गए| दिन ढलने लगा तो कुछ महिलाए सभा स्थल छोड़ कर अपने घरो की तरफ जाने लगी ऐसे मे पूर्व विधायक को 2022 की चिंता सताने लगी | अभी तो उन्होने अपने मन की बात बोली भी नहीं और लोग अपने नित्य के काम को लेकर घर जाने की जल्दी करने लगे | इस बीच जमीन पर बैठे पूर्व विधायक ने कई बार मंच संचालक को इशारो से वक्ताओ को जल्दी अपनी बात समाप्त करने के निर्देश दिये| ज़्यादातर तो मान गए पर नगर पालिका बड़ाहाट उत्तरकाशी के पालिका अध्यक्ष अपनी चुनावी घोषणा पूरी न हो पाने के कारण गिनाते रहे | मंच संचालक दिनेश गौड़ भी उन्हे अपनी बात पूरी करने से नहीं रोक पाये| आखिर इसी मंच से चुनाव प्रचार के दिनो पालिका अध्यक्ष बोलते बोलते रो दिये थे, और यही आँसू उनकी जीत का प्रसाद बनकर उन्हे नगर की छोटी सरकार की गद्दी तक पहुचा गए थे | पालिका अध्यक्ष रमेश सेमवाल रामलीला मैदान मे हरी घास नहीं लगा पाने की अपनी मजबूरी गिना ही रहे थे कि एक बार फिर भीड़ को जाता देख एक बार फिर से अपनी बात को संक्षिप्त मे रखने के निर्देश हुए | एक बार तो पालिका अध्यक्ष साफतौर पर मुकर गए फिर न जाने क्यू अचानक अपनी बात वही पूरी कर मंच पूर्व विधायक को सौंप दिया | दरअसल दोनों नेताओ कि अपनी अपनी मजबूरी है विधान सभा चुनाव 2022 के लिए तैयारी कर रहे पूर्व विधायक महिलाओ के जाने से परेसान थे वही पालिका अध्यक्ष आँसुओ कि बदोलत मिली जीत पर अपनी सफाई दे रहे थे |
