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पंचर पालिका – हाई कोर्ट ने कसा पेंच- अब जटायु दान की तैयारी।

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पंचर पालिका – कोर्ट ने कसा पेंच।

लौट के भुद्दु घर को आये – जमीन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी -हाई कोर्ट।
अध्यक्ष का दावा 20 मार्च तक सुरु होगा कूड़ा निस्तारण 
बिना युध्द के जटायु बीमार, अध्यक्ष ने जतायी जटायु दान की इच्छा।
गिरीश गैरोला।
अपने शपथ ग्रहण से लेकर अब तक भी उत्तरकाशी बाडा हाट नगर पालिका कूड़ा ग्रहण दोष से मुक्त नही हो सकी है। इस ग्रहण दोष से पालिका के अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे है। इस बीच हाई कोर्ट ने राज्य सरकार का पेंच कसते हुए पालिका को राहत दी है, जिसके बाद मामले की पूरी जिम्मेदारी की गेंद  राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में जिला प्रशासन के पाले में आ गयी है। 27 अप्रैल तक मामले का समाधान नही हुआ तो कोर्ट की अवमानना का केस बन सकता है वही चुनावी राजनीति के विवाद में उलझे पालिका अध्यक्ष रमेश सेमवाल ने अपनी गर्दन में उलझा फंदा अब विरोधियों के गले मे दमघोटू गांठ के साथ बांध दिया है।
कूड़ा निस्तारण प्रदेश की सभी पालिकाओँ में चुनोती बना हुआ है। अगर देखा जाय तो कूड़ा निस्तारण और नगर की सफाई ही पालिका का मुख्य कार्य है। नाली और खड़ंजा निर्माण के लिए कई  सरकारी विभाग लार टपकाते हुए लाइन में खड़े है। सफाई जैसे मुख्य कार्य को छोड़ कर निर्माण कार्य से बजट को ठिकाने लगाने की परंपरा के चलते ही सफाई और कूड़ा निस्तारण का कार्य पिछड़ता गया और नगर पालिका जैसी संस्था भी इंजीनियरिंग विभाग वाली निर्माण दाई संस्था में तब्दील हो गयी।
  पालिका गेट से लेकर अध्यक्ष के दफ्तर तक ठेकेदारों की परिक्रमा के बीच पर्यावरण मित्र सफाई कर्मियों की भर्ती और कूड़ा निस्तारण का मामला दबता चला गया।
नगर पालिका के दर्जनों वाहनो में न तो फिटनेस करवाई गई और न ही उनका टैक्स आरटीओ में जमा किया गया। नव निर्वाचित अध्यक्ष रमेश सेमवाल ने आते ही इन वाहनों की फॉर्मलटी पूरी होने तक इनके उपयोग पर पाबंदी लगा दी। अभी भी सड़क पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पालिका के निष्प्रयोज्य वाहन यहाँ वहाँ जगह घेरते दिखाई देते है जिज़के टायर भी जमीन में धंस गए है।
पालिका की सिटी बस घोटाला सबके सामने है। अब पालिका में सफाई के लिए आधुनिक मशीन के नाम पर करीब 25 लाख के जटायु वाहन भी पालिका कैम्पस में न सिर्फ धूल फांक रहे है बल्कि बेकार में जगह भी घेरे खड़े है। जानकारों की माने तो इसमें कम से कम चार प्रशिक्षित सफाई कर्मी लगाने पड़ते है जरा सी धूल में भी मशीन चोक हो जाती है जबकि दो दो इंजिन चलाने से यह आर्थिक दृष्टि से भी महंगा सौदा साबित हो रहा है।
अध्यक्ष नगर पालिका रमेश सेमवाल ने स्वीकर किया कि ये जटायु मशीन बेकार पड़ी है उन्होंने जटायु मशीन को डोनेट करने की इच्छा जताई है। किन्तु आज के दौर में कोई भी जटायु दान लेकर पुण्य का भागी नही बनना चाहता है।
उत्तरकाशी नगर का कूड़ा निस्तारण नगर पालिका की जिम्मेदारी है इसको लेकर जमकर खींचतान हुई, खुशकिस्मती ये रही कि पीले डब्बे की खुश्बू अभी तक आती रही इसलिए जनता भी चुपचाप नगर में फैले कुड़े की बदबू सूंघ कर भी अनदेखी करती रही। अब सवाल ये है कि चुनावी दौर में सभी दलों के प्रत्याशियों ने कुड़े की समस्या को चुटकी बजाकर हल करने का दावा किया था किंतु वो चुटकी आज तक नही बजी।
जिला प्रशासन और नगर पालिका के बीच जिम्मेदारियों की बाल खुद इधर से उधर उछलती रही। रामलीला मौदान के बाद कंसेन गाँव के पास और फिर तेखला खड्ड में कूड़ा डालने का प्रयास पर जिला प्रशासन की खूब फजीहत हुई।
अंत मे पालिका की हाई कोर्ट में दायर अपील पर न्यायलय ने राज्य सरकार को हर हाल में 27 अप्रैल 19 से पूर्व पालिका को कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए है। हालांकि अध्यक्ष रमेश सेमवाल ने दावा किया कि वे निजी प्रयासों से 20 मार्च तक कूड़ा निस्तारण की अस्थायी व्यवस्था कर देंगे।
लौट के भुद्दु घर को आये अब अगर राज्य सरकार की तरफ से डीएम को ही जमीन तलास करनी थी तो इतनी लंबी कसरत का क्या फायदा हुआ। ये बात उत्तरकाशी की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।




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