अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा हमें स्वयं करनीः त्रिवेंद्र

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देहरादून/राजस्थान। इंसान को अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए। क्योंकि यही से संस्कार पुष्पित पल्लवित भी होता है। यह बात भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को राजस्थान के ब्यावर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान जन्मोत्सव समारोह समिति द्वारा आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कही। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि धर्म जिंदा रहेगा, तो इंसान भी जिंदा रहेगा। उन्होंने कहा कि वे सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जन्मोत्सव कार्यक्रम में आकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहें हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आज हिन्दू (रावत राजपूत) जो विपरीत परिस्थितियों की वजह से बदल गये हैं,वे अपने मूल में लौटना चाहते हैं, हमें उनकी मदद करना चाहिए। क्यों कि वे दबाव की वजह से बदले हैं। यदि ऐसे लोग अपने मूल में लौटते हैं तो इसे धर्म परिवर्तन नहीं कहा जा सकता है। सच्चाई तो यह है कि वे अब अपने घर की वापसी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के लोगों ने अपने गांव का नाम नहीं बदला। क्यों कि उन्हें भविष्य पर यकीन है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने अपने 18 साल पहले राजस्थान के मेवाड़ और उदयपुर की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान उन्होंने एक रावतों के एक गांव का दौरा किया।
उस गांव में उनकी जमकर खातिरदारी की गई। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी पहले रावत समाज के लोग उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जाकर बसे। उस समय पहाड़ों पर कुछ नहीं था। जंगल, झरने और नदियों के अलावा कुछ था ही नहीं। फिर भी लोगों ने अपने आप को स्टैंड किया। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि आज मैं अपनों के साथ खड़ा हूं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लंबे अरसे से हमसे बिछड़ गए हैं उन्हें हमें स्वीकार करना होगा। यह हमारा पहला लक्ष्य भी होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। साथ ही समाज की भलाई के लिए कार्य करें। हमें देश की तरक्की के लिए कार्य करने होंगे।
देश किस तरह से सशक्त होगा। यह बात हमें समझने की कोशिश करनी होगी। शुक्रवार को संपन्न हुए इस भव्य शोभायात्रा और विशाल जनसभा में मुख्यवक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद जी परांडे, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाराव कोटा और पूर्व सांसद इज्यराज सिंह, कार्यक्रम से संयोजक इन्दर सिंह बागावास के अलावा विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों और कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे।

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