लंढोरा के कुँवर प्रणव चैंपियन को राजनीति के लिए टिहरी राज परिवार की जरूरत क्यो पड़ी ?

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दोनों हाथ मे पिस्टल और शराब का गिलास लेकर सोसल मीडिया मे उत्तराखंड को अपशब्द कहने वाले कुँवर प्रणव सिंह चैंपियन ने इस बार उत्तराखंड को लेकर ऐसा क्या बयान दिया है कि एक बार फिर चैंपियन  चर्चाओ  मे है । कभी झबरेड़ा विधायक से तो कभी निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को लेकर सोसल मीडिया मे विवादित टिप्पणी करने वाले चैंपियन का अंदाज इस बार बदला बदला है और इसी को लेकर इसके सियासी मायने भी  तलासे जा रहे है ।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि चैंपियन को अपना नाम बदलने कि नोबत  आ गई इतना ही नहीं उन्होने अपनी पत्नी के  भी नाम मे परिवर्तन कर दिया है।  ऐसा करके चैंपियन   गढ़वाल रियासत  से उनके 101 साल पुराने रिश्ते को फिर से पुनर्जीवित करने कि बात करने लगे है ।

चैंपियन को ऐसा क्यों महसूस हो रहा है कि उन्हें अब ये सब  कर लेना  चाहिए और इसके लिए उन्होंने नए साल को ही क्यों चुना,  इसको लेकर भी तमाम तरह कि  चर्चाओं का दौर सुरू हो गया है ।

सवाल यह भी है कि उन्होंने ये  व्यक्तिगत तौर पर किया है या या इसके कोई सियासी मायने हो सकते  हैं सियासी कोई कनेक्शन हो सकता है।  चैंपियन हमेशा अलग-अलग विवादो  को लेकर अलग-अलग बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे हैं लेकिन अब नए साल में उन्होंने ऐसा नया क्या किया है यह समझना बेहद जरूरी है ।

चैंपियन ने एक जानकारी साझा की है और यह लिखा है कि नए साल में रानी साहिबा और उन्होंने अपने अपने नाम में तर्कसंगत बदलाव किए  है वे बताते है  देवभूमि उत्तरांचल का निर्माण मातृशक्ति के बलिदान से हुआ है और  हमारी दादी जी भी पौड़ी लैंस डाउन  की पट्टी ज्योत स्यु ग्राम सीमार खाल की निवासी थी जिनका  नाम था रानी सरस्वती बिष्ट –  तो उनही   को सम्मान देने के लिय  रानी देवयानी जो कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की  धर्मपत्नी है के नाम मे बदलाव करने जा रहे  है । रानी देवयानी  इस बार खानपुर विधान सभा से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ी थी हालांकि उन्हे निर्दलीय उमेश कुमार से  हार का सामना करना पड़ा था । खैर चैंपियन की धर्म पत्नी का नाम अब गढ़वाल से उनकी  दादी सरस्वती बिष्ट के टाइटल को जोड़ते हुए रानी देवयानी बिष्ट हो जाएगा , तो ये एक बदलाव चैंपियन ने नए साल मे किया है  – लंधोरा की रानी साहिबा को अब रानी देवयानी बिष्ट बना दिया गया  है

अब चैंपियन ने खुद के नाम में क्या बदलाव किया है उस पर भी नजर डालते हैं कुँवर कहते है कि हम प्रतिनिधित्व करते हैं एक सांस्कृतिक धरोहर का जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की साझी  है और अब जब टिहरी गढ़वाल राज्य पर जब 1799 में  गोरखा आक्रमण हुआ था और दोनों ही पँवार राजवंश के राज्य थे तब टिहरी नरेश महाराज प्रदुमन शाह  को मदद के लिए लंढौरा नरेश राजा राम दयाल सिंह ने 12000 की विशाल सेना सेनापति मनोहर सिंह के नेतृत्व में टिहरी की मदद के लिए भेजी थी । सन 1800 में देहरादून के खुड्बुड़ा  में जबरदस्त युद्ध टिहरी लंढौरा संयुक्त सेना एवं गोरखा सेना के बीच हुआ अपने इस लंढौरा और गढ़वाल के 222 वर्ष पुराने रिश्ते को दादी ने 101 वर्ष पूर्व नवीनीकरण किया  था तब  हमारी दादी ने दादा जी से विवाह किया था इसलिए अब कुँवर प्रणव  सिंह का नाम होगा राजा प्रणब सिंह लंढौरा और इस नाम में उन्होंने चैंपियन का कहीं जिक्र नहीं किया है यह अभी  साफ नहीं है कि वह अपने नाम के आगे चैंपियन जोड़ेंगे या नहीं क्योंकि चैंपियन के साथ तमाम तरीके के सवाल और विवाद  उनके नाम के साथ हमेशा रहते हैं और जिस तरीके से उन्होंने नाम का बदलाव किया है उसको लेकर भी अब सियासी एंगल समझना जरूरी है । चैंपियन अब दरअसल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं लेकिन उत्तराखंड की सियासत से भी वह नाता तोड़ना नहीं चाहते और अपनी दादी जी का नाम इसलिए उन्होंने लिया है कि वह गढ़वाल के बिष्ट परिवार से  थी इसलिए रानी अपना बिस्ट सरनेम लगाएंगे,  यानी उत्तराखंड के पहाड़ के साथ अपना कनेक्शन चैंपियन जोड़े रखना चाहते हैं ।

दरअसल इस बार विधान सभा मे हार का मुंह देखने के बाद चैंपियन खुद के लिए नई जगह तलास  कर रहे है टिहरी गढ़वाल मे  वर्षो से लोक सभा मे प्रतिनिधित्व कर रही टिहरी रियासत की  तर्ज पर क्या  कुँवर खुद के लिए कोई जगह तलास  कर रहे है ?  क्या गढ़वाल मे पौड़ी जिले के योगी आदित्यनाथ जो अप यूपी के सीएम है कि तर्ज पर  खुद को सहारनपुर मे स्थापित करना चाहते है और पत्नी के लिए गढ़वाल के बिष्ट का टाइटल देकर उत्तराखंड मे भी गुंजाईस बनाए रखना चाहते है?  क्या खुद को यूपी  के सहारनपुर और पत्नी को उत्तराखंड से चुनाव लड़ाना चाहते है ?

कुँवर इस बार सियासत नई दिशा की तरफ ले जाना चाहते हैं लिहाजा वह राजनीतिक तौर पर खुद को उत्तर प्रदेश में स्थापित करना चाहते हैं और उत्तराखंड के साथ अपनी जड़ें भी जोड़े रखना चाहते हैं

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राजा प्रणव लंढोरा का यह बयान बेशक पुराना हो लेकिन इसमें वह अपने को उत्तराखंड कनेक्शन का जिक्र कर रहे हैं दादी जी का नाम ले रहे हैं गढ़वाल से उनका रिस्ता बता रहे हैं तो उनके बिष्ट नाम के सरनेम को ही उन्होंने अपनी पत्नी को रानी देवयानी बिष्ट जोड़ा है यानी उत्तराखंड के साथ वे अपना नाता जोड़े रखना चाहते हैं क्योंकि चैंपियन अपना सियासी सफर सहारनपुर से तय करना चाहते हैं सवाल यह है कि नाम बदलने के बाद क्या उनकी तकदीर भी बदल जाएगी क्या चैंपियन ने अपने नाम मे  जो राजा लगाया है वह टिहरी के राज परिवार की तरह राजनीति मे खुद को स्थापित कर पाएंगे ?

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