15 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में क्यों खरीदी? -दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

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हरिद्वार भूमि घोटाला: जांच पूरी, रिपोर्ट सरकार के पास – फिर भी कार्यवाही क्यों नहीं?”


देहरादून।
उत्तराखंड की आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार में सामने आया बहुचर्चित भूमि खरीद घोटाला अब प्रदेश सरकार के सिस्टम की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन व प्रशासन) सूर्यकांत धस्माना ने आज कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए इस घोटाले को “भ्रष्टाचार और संरक्षण” का स्पष्ट उदाहरण करार दिया।

उन्होंने कहा कि घोटाले की जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है, बावजूद इसके दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह साफ दिखाता है कि इस भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों को सत्ताधारी संरक्षण प्राप्त है।


💸 क्या है घोटाले की असल कहानी?

धस्माना के अनुसार, यह भूमि कृषि श्रेणी में आती थी, जिसका सर्किल रेट ₹6,000 प्रति वर्गमीटर था। इस तरह अगर इसे कृषि उपयोग में ही खरीदा जाता, तो कीमत महज ₹15 करोड़ होती।

लेकिन घोटाले की शुरुआत यहीं से होती है – पहले भूमि का भू-उपयोग बदला गया, और तुरंत बाद नगर निगम हरिद्वार ने उसका अनुबंध ₹54 करोड़ में कर दिया

यह पूरा खेल अक्टूबर से नवंबर 2024 के बीच बड़ी तेजी और गोपनीयता से निपटाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हो चुका है कि किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है – फिर भी सरकार अब तक चुप्पी साधे बैठी है।


🗣️ कांग्रेस की चेतावनी: अगर नहीं हुई कार्यवाही, तो होगा जनांदोलन

धस्माना ने सरकार से दो टूक पूछा –

रिपोर्ट आ चुकी है, दोषी सामने हैं – फिर कार्यवाही कब होगी?

उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार इस मामले में लटकाने-भटकाने की नीति अपनाती है तो कांग्रेस प्रदेश भर में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।


📌 Meru Raibar की नज़र में:

हरिद्वार जैसे आस्था के केंद्र में अगर सरकारी तंत्र ही भूमि के खेल में लिप्त दिखता है, तो सवाल न सिर्फ नियत पर उठता है, बल्कि न्याय और जवाबदेही की उम्मीदों को भी झटका लगता है।


✍️ संवाददाता | Meru Raibar
जनता पूछ रही है – दोषी कब होंगे बेनकाब?


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