धार्मिक आस्था, पर्यटन और सेना की जरूरत… सब दांव पर!
उत्तरकाशी से रिपोर्ट —
“ये सिर्फ एक सड़क नहीं, हमारी ज़िन्दगी की डोर है…” — मुखवा गांव की 65 वर्षीय भगवती देवी की आंखें भर आती हैं। बरसों से हर्षिल-मुखवा-जांगला सड़क की बाट जोह रही हैं। माँ गंगा की डोली के साथ वर्षो इसी सड़क से पैदल निकलना पड़ता है , लेकिन अब उम्मीद की लौ फिर जली है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने शुक्रवार को ऐलान किया — “हर्षिल-मुखवा-जांगला मोटर मार्ग का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा!”

DM ने अफसरों को सख्त निर्देश
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने शुक्रवार को एक अहम बैठक बुलाई। मुद्दा था — क्षतिपूरक वृक्षारोपण (CA Land) के लिए जमीन उपलब्ध कराना।
“यह सड़क सिर्फ आवागमन नहीं, बल्कि क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामरिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है,” — प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी उत्तरकाशी
सेना से लेकर पर्यटक… सबको राहत
- ये इलाका सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है।
- पर्यटन और धार्मिक यात्राओं का भी ये अहम मार्ग।
- स्थानीय लोगों की रोज़मर्रा की मुश्किलें होंगी कम।

मुखवा के लोगों ने कहा —
गंगोत्री पंडा समाज की तरफ से श्री राजेश सेमवाल ने दूरभाष पर बताया कि उनकी इस मामले को लेकर डीएम उत्तरकाशी से भेंट हुई थी , किन्तु सड़क निर्माण कार्य प्रारम्भ होने से पहले वे अपनी मांगो पर डटे रहेंगे। गौरतलब है कि हर्षिल-मुखवा-जांगला सड़क के निर्माण होने तक मुखवा के ग्रामीण पंचायत चुनावो के बहिस्कार की घोषणा कर रहे है.
सरकारी जमीन की होगी पहचान
DM ने तहसीलदार को आदेश दिया है कि वह राज्य सरकार की स्वामित्व वाली जमीन की पहचान करे ताकि वृक्षारोपण के लिए भूमि की अड़चन दूर हो सके।
“फाइलें नहीं, अब जमीन पर काम चाहिए।” — डीएफओ डी.पी. बलूनी
बैठक में SDM भटवाड़ी शालिनी नेगी, अधिशासी अभियंता लोनिवि अंदीप राणा VC के माध्यम से जुड़े। सबकी एक ही सोच — “अब और देर नहीं!”
क्या टूटेगी सालों की चुप्पी?
मुखवा-जांगला के गांवों में एक ही सवाल गूंज रहा है — क्या अब वाकई सड़क बनेगी?
उत्तरकाशी की बर्फीली हवाओं में आज उम्मीद की तपिश है।
क्योंकि जब इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ भी झुक जाते हैं… और सड़कें भी बन जाती हैं!
