भारी भूस्खलन ने लील ली थी दो यात्रियों की जान, श्रद्धालुओं में दहशत और सवाल
🌟 ओपनिंग
उत्तराखंड की पवित्र वादियों में इस बार भक्ति के सुरों में चीखें भी घुल गईं। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर 13 दिन पहले पहाड़ टूटा, मलबा गिरा और दो जिंदगियां गायब हो गईं। आज वो दोनों शव यमुना नदी की लहरों में बहते मिले… जैसे खुद नदी ने उनकी आख़िरी कहानी कह दी हो।
23 जून 2025, शाम करीब साढ़े चार बजे, यमुनोत्री पैदल मार्ग पर 9-कैंची के पास पहाड़ अचानक दरक गया। तेज़ आवाज़, धूल का गुबार और फिर सबकुछ खामोश…
दो यात्री मलबे में दब गए। तमाम खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।
और आज… 13 दिन बाद…
यमुनोत्री की उसी यात्रा पर एक और झटका लगा, जब दोनों यात्रियों की डेड बॉडी भगेली गाड़ यमुना नदी में तैरती हुई मिलीं।
🎙️ इमोशनल टच
जानकीचट्टी चौकी में पंचनामा किया गया। शवों को CHC नौगांव भेजा जा रहा है।
स्थानीय गाइड सुरेश राणा की आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा –
“हर साल बारिश में ये रास्ते जानलेवा हो जाते हैं। लेकिन लोग तो मां यमुनोत्री के दर्शन के लिए चले ही आते हैं… अब इन परिवारों का क्या होगा?”
मलवे के ढेर के बीच बिखरी यात्रियों की चप्पलें, टूटे डंडे और श्रद्धा के फूल… देवभूमि की यात्राओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
🔚 क्लोजिंग लाइन
यमुनोत्री की यात्रा भक्ति का सफर है, लेकिन अगर पहाड़ ही दुश्मन बन जाएं… तो कोई भी आस्था किसे बचा पाएगी? अब सवाल ये है — कब तक ऐसी दर्दनाक खबरें हमारे पहाड़ों से आती रहेंगी?
