यमुनोत्री यात्रा -सिलाई बैंड पर तबाही का मंजर, चौथे दिन भी मलबे में जिंदगी तलाश रहे स्निफर डॉग्स

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मलबे में दबे 7 लोग अभी भी लापता, यमुनोत्री यात्रा पर भी मंडराया साया!

उत्तरकाशी। घड़ी-घड़ी आसमान से बरसती आफत और ज़मीन पर चीखते पहाड़… उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सिलाई बैंड पर बादल फटने की त्रासदी ने ज़िन्दगियों को मलबे में दफना दिया है। सात लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरएफ की टीम चौथे दिन भी स्निफर कुत्तों की मदद से मलबा खंगाल रही है, शायद किसी के ज़िंदा होने की उम्मीद बाकी हो।

मलबा… चीखें… और रुक-रुक कर गिरती बारिश
बादल फटते ही सिलाई बैंड गांव में पानी और मलबे का सैलाब सब कुछ बहा ले गया। घर, रास्ते, जिंदगी… सब मलबे में दबकर रह गए।

“मेरे आंखों के सामने सब कुछ बह गया… बस बची हैं मिट्टी और यादें।”
— एक स्थानीय ग्रामीण, टूटती आवाज़ में

यमुनोत्री यात्रा पर संकट
उधर, यमुनोत्री हाईवे पर भी मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सिलाई बैंड ओजरी के पास चौथे दिन भी सड़क पर आवाजाही ठप है। लोग जान हथेली पर रखकर पैदल जा रहे हैं। डामटा के पास भी हाईवे बंद पड़ा है।

तीर्थ यात्रियों के लिए मुफ्त भोजन
फंसे यात्रियों के लिए प्रशासन ने सिलाई बैंड शैल्टर में निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की है। लेकिन डर और अनिश्चितता यात्रियों के चेहरों पर साफ दिखती है।

“भगवान ने दर्शन की राह दिखाई, लेकिन रास्ता ही टूट गया…”
— यमुनोत्री जा रही एक तीर्थयात्री

111 सड़कों पर ताला, पहाड़ कराह रहे
पूरे उत्तराखंड में बारिश का कहर इस कदर बरपा है कि 111 सड़कें मलबे में दबी हैं। सिर्फ उत्तरकाशी ही नहीं — चमोली, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, बागेश्वर… हर पहाड़ी जिला मानो जख्मी है।

एनएच के ईई मनोज रावत ने बताया कि “डामटा में हाईवे खोलने की पूरी कोशिश जारी है। लेकिन मौसम साथ नहीं दे रहा।”

लोगों की आंखों में सिर्फ एक ही सवाल — कब मिलेगा रास्ता? कब थमेगी आफत?


“पहाड़ों पर टूटी आफत… उम्मीद बाकी है कि मलबे के नीचे कहीं सांसें चल रही हों… उत्तराखंड फिर उठ खड़ा होगा!”



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