“करें योग, रहें निरोग” के संकल्प के साथ हरिद्वार की सड़कों पर बहा योग का उत्साह
ऋषिकुल से चंद्राचार्य चौक तक गूंजा – “योग से ही होगा रोग मुक्त भारत!”
हरिद्वार, 16 जून 2025।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर हरिद्वार की प्राचीन ऋषि परंपरा फिर से जीवंत हो उठी, जब सैकड़ों योग साधकों, छात्र-छात्राओं और चिकित्सा अधिकारियों ने “रन फॉर योग” में भाग लेकर यह संदेश दिया – “योग ही जीवन है।”
सुबह 6:30 बजे ऋषिकुल परिसर से आरंभ हुई यह यात्रा चंद्राचार्य चौक तक गई, जहां योग के नारों और उल्लास ने वातावरण को अध्यात्म से भर दिया।

योग – शारीरिक नहीं, आत्मिक स्वास्थ्य का मार्ग
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण त्रिपाठी ने योग को मधुमेह और हृदय रोग जैसे असाध्य माने जाने वाले रोगों का उपचार बताते हुए कहा,
“योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और उर्जावान बनाने की पूर्ण जीवनशैली है।”
बच्चों से बुजुर्गों तक सबके लिए वरदान
प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने योग को बच्चों में एकाग्रता और वृद्धजनों में चपलता का स्रोत बताते हुए कहा:
“योग चमत्कारी विज्ञान है – जो मन, मस्तिष्क और आत्मा तीनों को संतुलित करता है।”
हरिद्वार बना योग चेतना की राजधानी
डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने बताया कि पिछले दो माह से पूरे जनपद में योग और आयुर्वेदिक जागरूकता की गतिविधियां चल रही हैं – यह जनभागीदारी का एक शानदार उदाहरण है।
“माँ गंगा के संग बह रही योग की पावन धारा”
डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के नोडल अधिकारी ने चारधाम पंडाल में कहा –
“जैसे माँ गंगा भारत को शुद्ध करती है, वैसे ही योग मानवता को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि देता है।”
संपूर्ण आयोजन में दिखी भावनात्मक एकता
कार्यक्रम में पारंपरिक स्वागत, माल्यार्पण, और नागरिकों की सक्रिय उपस्थिति ने इसे एक सांस्कृतिक योग उत्सव का स्वरूप दिया।
डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा:
“योग का संदेश जन-जन तक पहुंचे – यही हमारा उद्देश्य है। इसमें हर चिकित्सा अधिकारी, फार्मेसी कर्मचारी और स्वयंसेवक की भूमिका अमूल्य रही है।”
विशेष धन्यवाद
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में डॉ. विक्रम रावत, डॉ. वीरेंद्र रावत, एवं फार्मेसी, पैरामेडिकल और योग प्रशिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही।
