– https://youtu.be/eQ_LXlPs058
कोरोना वायरस के प्रकोप से रोजगार के लिए मैदानी इलाकों में गए पहाड़ के रहने वाले लोग अब अपने घर गावो को लौटने लगे है। 22 मार्च के पूर्व घोषित जनता कर्फ्यू के बाद अचानक कर्फ्यू की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाये जाने और सरकारी गैर सरकारी कार्यलयों में अवकाश घोषित होने के बाद किसी तरह ऋषिकेष पहुचे इन लोगो को इनके ग्रह क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है इतना ही नहीं बसों में सवार होने से पूर्व मेडिकल जांच और सामाजिक दूरी की जागरूकता का भी साफ तौर पर अभाव देखने को मिल रहा है जिसके बाद घर जाने से पहले ही इन लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
पूजन अग्रवाल ऋषिकेष।

चीन इटली के बाद पूरे विश्व में फैले कोरोना की महामारी का अब व्यापक असर हमारे देश मे भी दिखाई देने लगा है,ऋषिकेश गढ़वाल के मुख्य जिलों का द्वार है और अब बाहर रहने वाले प्रवासी कोरोना के प्रकोप के चलते अपने अपने घरों को लौटने लगे हैं, लेकिन इन हजारो लोगो को इनके घर तक पहुचाने के प्रशासनिक इंतज़ाम नाकाफी साबित हो रहे है,
ऋषिकेश के यात्रा बस अड्डे पर अन्य प्रांतों से आने वाले पढ़े लिखे प्रवासियों की भीड़ शायद सरकार के लॉक डाउन और कोरोना वायरस की गंभीरता को भी नही समझ रही है और प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके मौके की नजाकत नही समझ पा रहे है, मौके पर मौजूद लोग प्रशाशनिक इंतज़ामात नाकाफी होने का रोना रो रहे है
पंजाब से आये हुए सुभाष राणा ने बताया कि बच्चोंके साथ वे किसी तरह ऋषिकेष पहुचे है जहाँ से अपने घर गाँव तक पहुँचने के लिए मुँहमाँगा दाम मांगा जा रहा है, सरकारी इंतजाम से बस के इंतजार में बच्चों को बिस्कुट से काम चलाना पड रहा है।
मौके पर जिला प्रशासन की कई टीम बाहर से आये हुए लोगो की थर्मल स्क्रिनिग ओर जरूरी जांच तो कर रही है लेकिन अचानक से यहां तक पहुचे लोगो की भीड़ के लिए यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है, क्षेत्रीय पटवारी ने बताया कि अभी मात्र 8- 10 बसों का ही प्रबन्ध हो पाया है