उत्तरकाशी : महर्षि नारद को चुगलखोर छवि मे प्रकट करना, लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का अपमान

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– शृष्टि के आदि पत्रकार महर्षि नारद को याद करते हुए पालिका सभागार में आयोजित हुआ पत्रकार मिलन कार्यक्रम

  आरएसएस के प्रचार विभाग ने नारद मुनि जयंती पखवाड़े के अंतर्गत किया  कार्यक्रम का आयोजन

उत्तरकाशी। देवर्षि नारद जयंती पखवाड़े के तहत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रचार विभाग इकाई की ओर से पत्रकार मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता का बदलते वर्तमान दौर में नारद के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता शासन व समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है।

एक षड्यंत्र के तहत ब्रह्मा के मानस पुत्र , सभी वेदो के ज्ञानी और सबसे पहले पत्रकार की भूमिका वाले महर्षि नारद को एक खास विचार धारा के लोगो द्वारा जानबूझ कर गलत छवि के साथ समाज मे प्रस्तुत किया गया । अंग्रेज़ो ने भी भारत की महान समृद्धिशाली परम्पराओ और यहा के काबिल  जनो को दरकिनार कर अपनी पसंद के विदेशी समकक्ष व्यक्तयों को एक रोल मॉडेल  के रूप मे प्रस्तुत किया और ये संदेश देने काप्रयास  किया कि पत्रकारिता कि सुरुवात ब्रिटिश शासन काल मे हुई । जबकि जन संचार के क्षेत्र मे  भारत विश्व के अग्रणी देशी मे से एक रहा है । अंग्रेज़ो के आने से सदियो पहले हमारे देश मे कुम्भ मेले मे लाखो लोग एक खास जन संचार प्रणाली के तहत ही एकत्र होते रहे है।  देश कि अन्य  तीर्थ यात्राओ मे भी लोग इसी विधा से सामिल होते आए है । दरअसल भारतीय  महा काब्य सिर्फ संस्कृत पढ़ने और समझने वालों तक सीमित हो कर रह गया जबकि अंग्रेज़ो मे अपनी भाषा को भारत कि हर भाषा के पाठ्यक्रम मे सामिल कर लिया , यही कारण रहा कि अङ्ग्रेज़ी मे कही गई  बात सत्य और संस्कृत मे कही  गई बात आडंबर समझने का प्रोपागैंडा चलाया गया । भारतीय पत्रकारिता ने भी जब अपनी जड़ो की तलास सुरू की तो सामने ब्रह्मर्षि नारद को ही पाया , आज के दौर मे जब ये कहा जाने लगा है कि पत्रकारिता मिशन न होकर व्यवसाय हो गई है तब भी हर व्यवसाय की  तरह इसके भी मानक तय होने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़िया उन मानदंडो पर चल सके । 
रविवार को पालिका सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. शिक्षा सेमवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक पत्रकारिता जगत में नारद की विचारों की प्रासांगिकता विषय पर पत्रकारों के समक्ष अपने विचार रखे। डा. शिक्षा ने देवताओं एवं दानवों के बीच नारद जी निष्पक्ष एवं निष्कपट कार्यशैली के विषय पर प्रकाश डालते हुए पत्रकारों के दायित्व का बोध कराते हुए शासन एवं समाज के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम बताया। मुख्य वक्ता पूर्णानंद भट्ट ने कहा कि संघ के प्रचार विभाग का कार्य समाज में राष्ट्र निर्माण के कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें एक उचित मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम अध्यक्ष गिरीश गैरोला ने सकारात्मक पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में लेखक मगनेश्वर नौटियाल ने देवर्षि नारद जयंती पर स्वरचित कविता का पाठ किया। कार्यक्रम में जिला कार्यवाह कमलेश्वर रतूड़ी, जिला प्रचारक अजय, सह नगर संघ चालक चतर सिंह सहित पत्रकार मौजूद रहे।

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