उत्तराखंड मे कानून व्यवस्था पर सड़क से सदन पर सरकार को घेरने के बाद भी कोई राह निकलती नहीं दिखाई दे रही है । विधान सभा मे सरकार की तरफ से कैबनेट मंत्री के वीआईपी को लेकर दिये गए बयान के बाद एक से बढ़कर एक सनसनीखेज मामले सामने आ रहे है । अंकिता भण्डारी मामले मे आरोपित वीजेपी के नेता रहे विनोद आर्य पर उसके ड्राईवर के गंभीर आरोप के बाद अब कुछ और नए राज खुलने की संभावना बताई जा रही है
अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या को करीब 3 महीने बीत चुके हैं अब तक ना तो चार्ज सीट दायर हुई और न ही केस की सबसे बड़ी गुत्थी कि वह बीआईपी कौन था? उसका खुलासा ही हो पाया है , हालांकि विधानसभा के पटल पर सरकार ने माना कि वीआईपी कोई शख्स नहीं बल्कि वीआईपी रिसोर्ट का कमरा था । इस बयान ने ने तूल पकड़ा और सरकार को जमकर किरकिरी का सामना करना पड़ा । इन सब के बीच पुलिस ने कोर्ट में तीनों आरोपियों के नारको टेस्ट कराने की मांग कर दी। खबर यह है कि दो आरोपी पुलकित और सौरभ नारको टेस्ट के लिए तैयार हैं जबकि तीसरा आरोपी अंकित नारकोटेस्ट के लिए 10 दिन का समय मांग रहा है । अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस ने वीआईपी कमरे का राज जानने के लिए नारको टेस्ट करवाना ही था तो सरकार ने जल्दबाजी में बयान क्यों दिया? पुलिस अभी तक चार्जसीट तक दायर नहीं कर पाई है । कानून के जानकार मानते हैं कि पुलिस और सरकार के विरोधाभासी बयानों से आरोपियों को फायदा हो सकता है । इधर कल जो खबर निकल कर आ रही है उसे हर कोई अवाक रह गया है । अंकिता के हत्यारे पुलकित के पिता विनोद आर्य पर गंभीर आरोप लग रहे हैं । आरोप लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि विनोद आर्य का ड्राइवर है । ड्राइवर का आरोप है कि विनोद आर्य ने मालिश के बहाने उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया । यहां सवाल यह भी उठता है कि आखिर ड्राइवर के पास ऐसे कौन से राज थे जिसके लिए उसे रास्ते से हटाने की नापाक साजिश रची गई। जाहिर है पुलिस इस मामले की तफ्तीश करेगी तो कहीं और राज से पर्दा हटेगा पूरा उत्तराखंड अंकिता के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है खुद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी कह चुके हैं कि हर स्थिति पर आरोपियों को कठोर से कठोर सजा दी जाएगी लेकिन तभी मुमकिन होगा जब पुलिस मजबूत साक्ष्यों के साथ कोर्ट में मजबूत पैरवी भी करेगी
