हरीश रावत की हार में करीबियों का बड़ा हाथ होने का आरोप

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र 19 सीटों पर ही सिमट कर रह गई है। यहां तक की कांग्रेस के कई दिग्गज नेता भी चुनाव हार गए है। जिसमें पूर्व सीएम हरीश रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल तक का नाम शामिल है।
कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत खुद नैनीताल जिले की लालकुआं विधानसभा सीट से चुनाव हार गए है। हरदा को बीजेपी प्रत्याशी डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने 17,527 वोटों से हराया है। यदि इस मामले में कांग्रेस नेता गोपाल रावत की मानें तो हरीश रावत लालकुआं विधानसभा सीट से हराने वाले नहीं थे, लेकिन उनके साथ दो लोग घूम रहे थे, 9 और 10 नंबरी। उन्होंने ही हरीश रावत को हरवाया है। इन लोगों ने जमीन पर कोई काम नहीं किया। इसीलिए हरीश रावत लालकुआं में हार गए। गोपाल रावत बिना नाम लिए एक पूर्व कैबिनेट मंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कि वे लोग अपने बूथ से हरीश रावत को वोट नहीं दिला पाए। इन्होंने हरीश रावत को कार्यकर्ताओं से नहीं मिलने दिया। इसी वजह से हरीश रावत को जमीनी सच्चाई का पता नहीं चल पाया। ऐसा ही कुछ मानना है राजनीति के जानकार बीसी भट्ट का. बीसी भट्ट के अनुसार हरीश रावत को पार्टी के कुछ नेताओं ने लालकुआं में एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि सैलिब्रटी बना दिया। यही कारण है कि हरीश रावत अपने क्षेत्र में मेहनत नहीं कर पाए। कार्यकर्ता बूथ पर काम करने के बजाए हरीश रावत के साथ घूमता रहा, जिसका परिणाम सबके सामने हैं। इसके अलावा वो एक और बड़ा कारण मान रहे हैं। बीसी भट्ट की मानें तो बीजेपी जनता को ये विश्वास दिलाने में कामयाब हो गई कि हरीश रावत बाहरी नेता और बीजेपी प्रत्याशी मोहन बिष्ट यहां के स्थानीय, जिसका फायदा बीजेपी को मिला भी।

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