हर्षिल की घाटी में विकास का सूरज!
सेना और प्रशासन की साझा पहल—बर्फीली सीमाओं पर अब उगेंगे रोजगार और संस्कृति के नए सूरज
🚨 बड़ी खबर | विकास की दौड़ अब गांवों की ओर!
उत्तरकाशी के दुर्गम सीमांत गांवों में अब सिर्फ बर्फ नहीं गिरेगी, बल्कि उम्मीदें भी खिलेंगी। “वाइब्रेंट विलेज योजना” के अंतर्गत जिला प्रशासन और भारतीय सेना के सहयोग से “अंडर ऑफ सद्भावना” कार्यक्रम का आगाज़ हो चुका है—एक ऐसा कदम, जो गांवों की किस्मत बदलने का दावा कर रहा है।
🍎 ‘झाला’ बनेगा सेबों का हब, किसान बनेंगे उद्यमी
गुरुवार को जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लेफ्टिनेंट कर्नल टिज्यू थॉमस ने बताया कि झाला गांव में एप्पल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है।
“ये यूनिट न केवल सेबों का मूल्य बढ़ाएगी, बल्कि सीमांत किसान परिवारों के जीवन स्तर को भी ऊंचाई देगी,” —लेफ्टिनेंट कर्नल टिज्यू थॉमस

📻 रेडियो से बोलेगा पहाड़, गांवों की आवाज़ अब देशभर में गूंजेगी
सीमांत गांवों में अब सामुदायिक रेडियो स्टेशन की योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की स्वीकृति से गांवों की खबरें, संस्कृति और सरकार की योजनाएं सीधे लोगों तक पहुंचेंगी।
“रेडियो गांवों को जोड़ेगा, लोगों को जागरूक करेगा और संवाद का सशक्त मंच बनेगा,” —जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान बिष्ट
🎉 हर्षिल हैरिटेज फेस्टिवल: परंपरा, पर्यटन और पहचान का महाकुंभ
बैठक में यह तय किया गया कि हर्षिल हैरिटेज फेस्टिवल का आयोजन विश्व पर्यटन दिवस पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य हर्षिल की समृद्ध संस्कृति, पर्यटन और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है।
“हमें हर्षिल को विश्व मानचित्र पर लाना है—यह उत्सव सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता का प्रदर्शन होगा,” —डॉ. बिष्ट
🤝 सेना और प्रशासन की साझेदारी: सीमाओं पर सिर्फ रक्षा नहीं, विकास भी!
जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि सेना की हर पहल में प्रशासन कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा। एप्पल यूनिट से लेकर रेडियो स्टेशन और हेरिटेज फेस्टिवल तक—हर योजना में तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग पूरी तत्परता से मिलेगा।
🧘♂️ विश्व योग दिवस पर भी बड़ी तैयारी
इससे पहले जिलाधिकारी ने 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा भी की और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
👉 सोचिए…
जहाँ कभी पहाड़ों की चुप्पी विकास की कमी को बयान करती थी, अब वहाँ उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सेना और प्रशासन की इस साझा पहल से सीमाएं अब सिर्फ सरहद नहीं रहेंगी—वो बनेंगी संस्कृति, समृद्धि और संवाद की सीमारेखा।
🌟 क्या आप तैयार हैं, उस नए उत्तरकाशी को देखने के लिए, जो खुद को फिर से गढ़ रहा है?
📰 Meru Raibar News | सीमांत की बात, सीधे दिल से
