“चैनलिंक घेरबाड़ योजना से टिहरी के गांवों में वापस लौट रही है खेती की खुशहाली, किसानों का मनोबल हुआ आसमान पर!”
टिहरी गढ़वाल: जब फसलें जंगली जानवरों के आतंक से सुरक्षित हों, तो खेती में फल-फूलना स्वाभाविक है! टिहरी गढ़वाल में जिला प्रशासन की चैनलिंक घेरबाड़ योजना ने 31 परिवारों की ज़मीनों को जंगली जानवरों से बचाकर नई उम्मीदें जगाईं हैं।
जिला प्रमुख मयूर दीक्षित के सख्त निर्देशन में, विकासखंड जौनपुर के उनियाल और हबेली गांवों में पिछले साल कुल 244 चैनलिंक घेरबाड़ बनाए गए। इसका असर दिख रहा है — खेत हरे-भरे, किसान खुशहाल और पलायन घटा!

उनियाल गांव की वन्दना उनियाल कहती हैं, “पहले जंगली जानवरों की वजह से हमारे खेतों का नुकसान होता था, जिससे हम निराश हो गए थे। अब घेरबाड़ बनने के बाद, हमारी फसलें सुरक्षित हैं और हम फिर से खेती से उम्मीद बांध रहे हैं।”
गांव की प्रधान सुषमा देवी ने बताया, “घेरबाड़ के कारण जंगली जानवरों का आतंक खत्म हुआ, खेतों में जीवन लौट आया है और लोग खेती से बेहतर आमदनी कर रहे हैं।”
मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी के अनुसार, “यह योजना किसानों को मोटे अनाज और हाई वैल्यू फसलों की ओर बढ़ने का साहस दे रही है। हम जल्द ही और गांवों में इस योजना को बढ़ाएंगे।”
टिहरी गढ़वाल की धरती पर ये योजना साबित कर रही है कि सही दिशा में की गई मेहनत और समर्पण से ग्रामीण जीवन में खुशहाली और समृद्धि जरूर आती है। किसानों की मुस्कान अब इस घेरबाड़ के हर चक्कर में बस रही है।
