खटीमा पहुंचे कर्नल कोठियाल का हुआ जोरदार स्वागत, सीएम के विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूल का भी लिया जायजा

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खटीमा। आप पार्टी के सीएम उम्मीदवार कर्नल अजय कोठियाल खटीमा विधानसभा के झनकट पहुंचे जहां पहुंचते ही सैकडों की संख्या में स्थानीय लोगों ने कर्नल कोठियाल का जोरदार स्वागत किया । इसके बाद कई गाडियों के काफिले और सैकडों कार्यकर्ताओं के साथ वो सबसे पहले  शहीद स्थल पहुंचे और देश पर अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया। इसके बाद उनका काफिला आगे बढा जिसमें सैकडों की तादाद में लोग उनके काफिले में मौजूद रहे। यहां से वो पूर्व अध्यक्ष एस एस कलेर और और रमेश राणा जी के साथ  सीधे खटीमा विधानसभा के गोझरिया पटिया  मेहर सिंह चुफाल के आवास पहुंचे जो 4 कुमांउ राइफल में रहते हुए 1962,1965 और 1971 की लडाई में अपना अहम योगदान दे चुके हैं। उनसे कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कर्नल कोठियाल को 21 रुपये देकर प्रदेश नवनिर्माण के लिए आशिर्वाद दिया।
यहां से आगे बढते हुए वो सबोरा पहुंचे जहां थारु जनजाति के लोगों ने उनका फूलों से पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान थारू समाज के कई लोगों से उन्होंने बात की ओर उनसे जुड़ी जानकारी ली।  इन सभी लोगों से मुलाकात के बाद वो बिरिया के लिए निकले। बिरिया में वो राजकी प्राथमिक विद्यालय पहुंचे और स्कूल का निरिक्षण किया। यहां  स्कूल पहुंचकर वो सबसे पहले  छोटे बच्चों से मिले जिन्होंने कर्नल कोठियाल से हाथ मिलाया।उन्होंने उसके बाद  इस जर्जर स्कूल को देखा तो उनको बड़ा अफसोस हुआ कैसे ऐसे स्कूलों में उत्तराखंड का भविष्य पढ़ रहा है।  उन्होंने कहा,स्कूल के हालत ऐसे हैं कि यहां कभी भी कोई बडा हादसा हो सकता है। इस दौरान यहां की शिक्षिका ने कर्नल कोठियाल से कहा कि इस स्कूल में एक दो बच्चे मौजूद  थे और स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया था ,लेकिन शिक्षिका ने खुद क्षेत्र में जा जा कर बच्चों को इकट्ठा करके उन्हें स्कूल में भर्ती करवाया। यहां मौजूद भोजन माता और स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार ने इस स्कूल को बर्बाद करके रख दिया है। इस सरकारी स्कूल में हर तरफ कूडे के ढेर लगे हुए थे। इमारत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। इसपर कर्नल कोठियाल ने अफसोस जताते हुए कहा कि यह हाल है प्रदेश के मुख्यमंत्री की विधानसभा के स्कूलों का है तो बाकी प्रदेश में क्या हालात होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बताया कि अभी दो दिन पहले वो दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में गए थे और वहां के स्कूलों को देखकर हैरान रह गए कि सरकारी स्कूलों में जैसी शिक्षा वहां की सरकार दे रही है उसके मुकाबले यहां के स्कूलों का बुरा हाल है। यहां लोगो में इन स्कूलों के प्रति भी काफी नाराजगी थी। इसके बात वो अंदर गए और देखा कि जगह जगह बिल्डिंग टूटी हुई थी। बच्चे जमीन पर बैठे हुए थे। छत टूटने की कगार पर थी। यहां बच्चों का भविष्य बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है। उन्होंने यहां के लोगों से कहा कि इस व्यवस्था के खिलाफ लोगों को संघर्ष करना चाहिए।

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