“संसदीय समिति से भिड़ी कांग्रेस, दो टूक कहा – नहीं चाहिए एक साथ चुनाव”

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कांग्रेस का ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर प्रहार: लोकतंत्र के संघीय ढांचे के खिलाफ बताया प्रस्ताव

देहरादून, 21 मई 2025।
“वन नेशन, वन इलेक्शन” पर देशभर में मंथन जारी है, लेकिन उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। बुधवार को देहरादून स्थित होटल ताज में संयुक्त संसदीय समिति द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लेकर इस प्रस्ताव के खिलाफ स्पष्ट और मुखर विरोध दर्ज कराया।

✍️ प्रतिनिधिमंडल में कौन थे शामिल?

बैठक में कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन व प्रशासन) सूर्यकांत धस्माना और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात शामिल हुए। दोनों नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विचार संविधान और लोकतंत्र के संघीय ढांचे के खिलाफ है।


🗣️ सुर्यकांत धस्माना बोले: त्रिस्तरीय सरकार की आत्मा के खिलाफ है यह प्रस्ताव

श्री धस्माना ने तर्क दिया कि भारत एक संघीय व्यवस्था वाला राष्ट्र है, जहां तीन स्तर की सरकारें — केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय — अलग-अलग मुद्दों और अधिकार क्षेत्रों में काम करती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि—

“अगर किसी राज्य सरकार का बहुमत गिरता है तो क्या लोकसभा के साथ सभी राज्यों की विधानसभाएं भंग कर दी जाएंगी?”

उन्होंने इसे संवैधानिक जटिलता और जन प्रतिनिधित्व की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया।


🗣️ नवप्रभात का सुझाव: एक वोटर लिस्ट, एक वोटर कार्ड हो प्राथमिकता

पूर्व मंत्री नवप्रभात ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि—

“‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के बजाय केंद्र सरकार को एकल वोटर कार्ड और एकसमान वोटर लिस्ट की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, जो लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों में समान रूप से मान्य हो।”

उन्होंने कहा कि इससे समय, संसाधन और मानव श्रम की भारी बचत होगी, और चुनाव व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सरल बन सकेगी।


📄 कांग्रेस ने सौंपा विरोध-पत्र

बैठक के अंत में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त संसदीय समिति को प्रदेश कांग्रेस की ओर से विरोध पत्र सौंपते हुए यह मांग की कि इस प्रस्ताव को जनविरोधी मानते हुए वापस लिया जाए


🧾 Meru Raibar का विशेष विश्लेषण:

  • क्या वन नेशन, वन इलेक्शन लोकतंत्र को सशक्त बनाएगा या कमजोर?
  • विपक्ष की राय में यह सत्ता केंद्रीकरण का प्रयास है
  • क्या इस पर जनता की राय लेना ही पर्याप्त है, या यह जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को सीमित करेगा?

Meru Raibar आप तक पहुंचाता रहेगा ऐसे सभी राजनीतिक विमर्शों और निर्णयों के प्रभावों की सटीक रिपोर्टिंग

📍 आपका भरोसा, आपकी आवाज़ – Meru Raibar।


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